अमिलो। कमिश्नर और जिलाधिकारी के आदेश के बाद भी किसान खेतों में फसलों का अवशेष जलाना नहीं छोड़ रहे हैं। इससे जहां खेतों की उर्वरा क्षमता कमजोर रही है, वहीं धान की फसल की कटाई मशीन से कराने के बाद अवशेष खेतों में जलाना पशुपालकों के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। पशुपालकों में रोष व्याप्त है।
पिछले दिनों कमिश्नर और जिलाधिकारी की ओर से खेतों में फसलों के अवशेष जलाने और कंबाइन मशीनों के बिना रीपर कटाई करने पर कार्रवाई की बात कही गई थी। इसके बाद भी सठियांव के ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अपनी सुविधाओं के लिए मशीनों पर निर्भर होकर कृषि कार्य कर रहे हैं। बिना रीपर मशीनों से फसल कटवाई जा रही है और फसलों के अवशेष को खेतों में जलाया जा रहा है। जिससे पशुपालकों के सामने चारे की समस्या बढ़ती जा रही है। महंगे दाम पर चारा खरीदना पड़ रहा है। पशुपालकों ने बताया कि जबसे फसलों की कटाई मशीन से होती है, तबसे ही चारे का भाव आसमान चढ़ गया है। भूसा और पुवाल चारे के काम आता है।