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1100 करोड़ के कर्जदार हैं जिले के किसान

Mon, 20 Apr 2015 12:04 AM IST
अंबुज राय, आजमगढ़
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मौसम की मार से जनपद के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं। उन्हें सबसे ज्यादा बैंकों से लिए गए कर्ज को चुकाने की चिंता खाए जा रही है। जिन फसलों को बेचकर वह बैंकों का कर्ज चुकाते, वह तो बर्बाद हो चुकी है। इसी चिंता में अब तक जनपद के कई किसान अपनी जान से हाथ धो बैठे हैं। जनपद में किसानों को विभिन्न बैंकों द्वारा फसली ऋण के तहत लगभग चार अरब 87 करोड़ 72 लाख रुपये और अन्य कृषि ऋण के तहत सात अरब 35 करोड़ 53 लाख रुपये का ऋण दिया गया है।
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बैंक फसली ऋण अन्य कृषि ऋण
इलाहाबाद बैंक 15.26 करोड़ 28.30 करोड़
बैंक आफ बड़ौदा 8.87 करोड़ 17.26 करोड़
बैंक आफ इंडिया 1.86 करोड़ 3.36 करोड़
बैंक आफ महाराष्ट्रा 18 लाख 78 लाख
केनरा बैंक 22 लाख 1.26 करोड़
सेंट्रल बैंक 2.28 करोड़ 3.2 करोड़
कारपोरेशन बैंक 18 लाख 48 लाख
इंडियन ओवरसीज बैंक 39 लाख 68 लाख
ओरिएंटल बैंक आफ कामर्स 1.10 करोड़ 2.32 करोड़
पंजाब नेशनल बैंक 22.50 करोड़ 38.50 करोड़
पंजाब एंड सिंध बैंक 22 लाख 48 लाख
स्टेट बैंक आफ इंडिया 63.20 करोड़ 103.22 करोड़
सिंडीकेट बैंक 12 लाख 34 लाख
यूको बैंक 1.85 करोड़ 3.25 करोड़
यूनियन बैक आफ इंडिया 205.8 करोड़ 318.17 करोड़
विजया बैंक 38 लाख 58 लाख
काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक 163.20 करोड़ 212.25 करोड़
कोआपरेटिव बैंक 48 लाख 48 लाख

कारोबार में आगे लेकिन ऋण बांटने में रहे पीछे ः एक तरफ जहां सरकारी बैंकों ने अपनी विभिन्न शाखाओं के माध्यम से किसानों को ऋण देने में कोई कंजूसी नहीं की। वहीं, प्राइवेट बैंक इससे बचते नजर आए।

जहां आईसीआईसीआई बैंक की ओर से फसली ऋण के तहत लगभग 14 लाख और अन्य कृषि ऋण के तहत लगभग 31 लाख, एचडीएफसी बैंक द्वारा फसली ऋण के तहत लगभग 18 लाख और अन्य कृषि ऋण के तहत लगभग 46 लाख रुपये का वितरित किया गया। वहीं ऐक्सिस बैंक ने ऋण बांटने से परहेज किया। इसका परिणाम है कि ऐक्सिस बैंक का किसानों पर एक भी रुपये का बकाया नहीं है।
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सबसे आगे यूनियन बैंक तो सबसे पीछे ऐक्सिस बैंक ः जनपद का अग्रणी बैंक होने के नाते किसानोें को फसली और अन्य कृषि ऋण देने में यूनियन बैंक सबसे आगे रहा। यूनियन बैंक ने अपनी 103 शाखाओं के सहारे जनपद में लगभग 205 करोड़ आठ लाख रुपये का फसली ऋण और लगभग 318 करोड़ 17 लाख रुपये अन्य कृषि ऋण वितरित किया। वहीं इस मामले में ऐक्सिस बैंक अपनी एक शाखा के साथ सबसे पीछे रहा। बैंक ने किसानों को ऋण देने में कोई रुचि नहीं ली।

शासन से की गई 39 करोड़ की मांग ः जनपद में मौसम की मार झेल रहे किसानों को मरहम लगाने के लिए प्रशासन पूरी तरह से तैयार है। एडीएम (वित्त एवं राजस्व) बृजेश कुमार ने बताया कि किसानों की क्षति का आकलन किया जा रहा है। उन्हें मुआवजा देने के लिए शासन से 39 करोड़ रुपये की मांग की गई है। जैसे ही यह धनराशि हमें मिल जाती है, वैसे ही किसानों में वितरित करने का कार्य शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि किसानों के नुकसान को देखते हुए जनपद में किसानों से वसूली के लिए दबाव नहीं बनाया जाएगा। साथ ही उनकी कुर्की नीलामी आदि की कार्रवाई भी नहीं की जाएगी।
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