निजामाबाद। कई वर्षों से लगातार कोर्ट न चलने से परेशान वादकारियों ने बुधवार को तहसील में प्रदर्शन कर नारेबाजी की। वादकारियों का कहना है कि कभी अधिकारियों के न होने तो कभी अधिवक्ताओं के हड़ताल पर होने का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। वहीं, कोर्ट न चलने के लिए एसडीएम ने अधिवक्ताओं के प्रस्ताव को जिम्मेदार बताया।
बुधवार को तहसील न्यायालय पहुंचने वादकारियों ने सुनवाई न होने पर प्रदर्शन किया। वादकारियों का कहना था कि उपजिलाधिकारी के नहीं होने से कोर्ट कई वर्षों से नहीं चल रही है। वादी निर्मला निवासी बड़हरिया ने बताया कि वो तकरीबन पांच वर्षों से लगातार तहसील का चक्कर काट रही हैं। पांच वर्षों में सिर्फ दो से तीन दिन कोर्ट चला है। बुद्धसेनपुर निवासी बुधिराम और धर्मराज, महुआर निवासी बद्री, भवानीपुर निवासी रामचेत ने बताया कि वादकारी पांच साल से तहसील आते हैं और अधिवक्ताओं को फीस देकर चले जाते हैं। कभी अधिवक्ता हड़ताल पर होते हैं तो कभी उपजिलाधिकारी नहीं होते। इस दौरान वादकारियों ने उच्च अधिकारियों से समस्या से निजात दिलाने की मांग की।
तहसील में लंबित हैं 1140 मामले, अधिवक्ता नहीं दे रहे सहयोग
निजामाबाद। एसडीएम वागीश कुमार शुक्ल ने बताया कि दो माह से मैं निजामाबाद तहसील में हूं। मैंने कई बार प्रयास किया कि तहसील में कोर्ट का सही ढंग से चले, लेकिन अधिवक्ताओं की हड़ताल से एक दिन भी कोर्ट नहीं चल पाई है। राजस्व परिषद ने निर्देशित किया है कि पांच वर्षों से पुराने मुकदमों को 31 मार्च 2018 तक निस्तारित किया जाए। इसके बाद भी कोई कार्य नहीं हो पा रहा है। देश-प्रदेश में कहीं समस्या होने पर अधिवक्ता प्रस्ताव देकर काम बंद कर देते हैं।
कोट-
वादकारी लगातार मुकदमों के संबंध में तहसील के चक्कर काट रहे हैं। एसडीएम की ओर से तारीख दे दी जाती है। अधिवक्ताओं और अन्य के उत्पीड़न के खिलाफ एसोसिएशन संघर्ष जारी रहेगी। -रणविजय राय, पूर्व अध्यक्ष तहसील बार एसोसिएशन