फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राष्ट्रीय लोक अदालत में 10,143 वादों का हुआ निस्तारण

विज्ञापन
विज्ञापन
आजमगढ़। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दीवानी न्यायालय के तत्वावधान में शनिवार को न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिसमें आपसी सुलह-समझौता के आधार पर कुल 10,143 वादों का निस्तरण किया गया। जब कि विभिन्न बैंक से लिए गए ऋण के एवज में 9810000 रुपया जमा कराए गए। सुबह 10.30 बजे से शुरु हुए लोक अदालत में वादों का निस्तारण शाम तक चलता रहा।
विज्ञापन

राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन न्यायालय के हाल आफ जस्टिस में जनपद न्यायाधीश दिनेश चंद्र ने किया। इस दौरान नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत ओम प्रकाश वर्मा, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अनीता,पारिवारिक न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश लालता प्रसाद सहित अनेक न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे। राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन करते हुए जनपद न्यायाधीश ने कहा कि लोक अदालतों का उद्देश्य कम समय में अधिक से अधिक मुकदमों का निस्तारण कराना होता है। इनमें वे मामले निस्तारित होते है जो दोनों पक्षों को मान्य होते है। इसमें किसी पक्षकार की हार नहीं होती। आपस में प्रेम समरसता की भावना जागृत होती है। साथ ही वादकारियों का अनावश्यक धन व्यय होने से बचता है। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों से सुलह समझौते के आधार पर मामलों का निस्तारण कराए जाने की अपील की।
इस दौरान अदालतों के पीठासीन अधिकारी लक्ष्य के सापेक्ष मुकदमों के निस्तारण में जुट गए। राष्ट्रीय लोक अदालत में 19,268 वादों का लक्ष्य रखा गया था। जब कि 10,143 वादों का ही निस्तारण किया गया। इस संबंध में विधिक सेवा की सचिव अनीता ने बताया कि जनपद न्यायाधीश की अदालत से कुल 15 वादों का निस्तारण किया गया। अपर जिला जज शिवचंद्र की अदालत से पांच वाद, प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय लालता प्रसाद की अदालत से कुल 21 वादों का निस्तारण किया गया। जिसमें पांच लाख दस हजार रुपये धनराशि का समझौता हुआ। इसी क्रम में पारिवारिक न्यायालय द्वारा अलग रह रहे दंपत्तियों के वादों का सुलह समझौते के आधार पर निस्तारण कराकर उनको एक साथ रहने का आर्शीवाद देकर और माल्यार्पण कर विदा किया गया। इसी प्रकार विभिन्न बैंकों और बीएसएनएल द्वारा भी स्टाल लगाकर प्री लिटिगेशन के 471 वादों का निस्तारण करते हुए कुल 9810000 रुपये वसूल किए गए और 29639050 रुपये का समझौता किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें