जीतेश कांत पांडेय
अयोध्या। कभी घरों में सिक्कों और नोटों से भरी गुल्लक महिलाओं और बच्चों की छोटी बचत का हिस्सा होती थी। बदलते दौर में उसकी जगह मोबाइल और यूपीआई ने ले ली है, जिससे गृहिणियों से लेकर छात्राएं तक डिजिटल भुगतान को प्राथमिकता दे रही हैं। इस बदलाव का असर यह है कि कई घरों में अचानक जरूरत पड़ने पर नकद 10 रुपये तक नहीं मिल पाते।
डिजिटल भुगतान का चलन तेजी से बढ़ रहा है। बाजार, दुकानों और छोटे कारोबार में नकदी के बजाय यूपीआई से भुगतान आम होता जा रहा है। इसका सीधा असर घरों की बचत के तरीकों पर भी दिखाई दे रहा है। पहले महिलाएं और बच्चे छोटी-छोटी बचत गुल्लक में रखते थे, लेकिन अब वही पैसा सीधे बैंक खाते या मोबाइल वॉलेट में पहुंच रहा है।
गृहिणियों और छात्राओं के बीच डिजिटल भुगतान का उपयोग तेजी से बढ़ा है। अवध विश्वविद्यालय की छात्रा रागनी गौतम ने बताया कि वह बाजार, कोचिंग फीस, मोबाइल रिचार्ज और खाने-पीने तक का भुगतान यूपीआई से करती हैं। उन्होंने कहा कि पहले पर्स में नकद रखना जरूरी लगता था, लेकिन अब मोबाइल साथ होना ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।विश्वविद्यालय की छात्रा रुचि पांडेय ने बताया कि वह भी ऑटो किराया, फूड ऑर्डर और खरीदारी तक में मोबाइल पेमेंट का उपयोग करती हैं।
डिजिटल भुगतान ने महिलाओं की बचत की पुरानी आदतों को भी प्रभावित किया है। सिविल लाइंस निवासी भारती सिंह ने बताया कि डिजिटल भुगतान से सुविधा जरूर बढ़ी है, लेकिन बचत की पुरानी आदत कम होती जा रही है। पहले बच्चे भी गुल्लक में सिक्के जमा करते थे, लेकिन अब हर छोटा खर्च ऑनलाइन हो रहा है। इससे गुल्लक जैसी पुरानी बचत की आदतें धीरे-धीरे खत्म होती जा रही हैं।
रानोपाली की आभा पांडेय ने बताया कि पहले घर में सिक्के और 50-100 रुपये के कुछ नोट रखे रहते थे, जिससे छोटी खरीदारी आसानी से हो जाती थी। लेकिन अब ज्यादातर भुगतान मोबाइल से होने लगा है, जिससे कई बार अचानक जरूरत पड़ने पर घर में नकद 10 या 20 रुपये तक नहीं मिलते।
दर्शन नगर में ब्यूटी पार्लर चलाने वाली अरुण लता ने बताया कि ग्राहक क्यूआर कोड स्कैन कर भुगतान करते हैं, जिससे हिसाब रखना आसान हो गया है और नकदी संभालने की जरूरत कम हुई है। हालांकि, दर्शन नगर की अंजलि तिवारी ने बताया कि कई बार नेटवर्क या मोबाइल बंद होने पर दिक्कत भी होती है, क्योंकि पास में नकद नहीं रहता।