अयोध्या। रामनगरी स्थित हनुमानगढ़ी और पूर्वी भारत के प्रमुख तीर्थ गंगासागर (कपिल मुनि मंदिर ) के बीच सदियों पुराना आध्यात्मिक संबंध एक बार फिर चर्चा में है। हनुमानगढ़ी की परंपरा की एक शाखा गंगासागर तक जुड़ी है, जहां कपिल मुनि मंदिर में भगवान हनुमान की उपस्थिति इस रिश्ते को और प्रगाढ़ बनाती है। कपिल मुनि मंदिर हनुमानगढ़ी अखाड़ा की शाखा मानी जाती है। इसकी व्यवस्था हनुमानगढ़ सागरीय पट्टी के महंत ज्ञान दास के शिष्य संकट मोचन सेवा के अध्यक्ष महंत संजय दास संभालते हैं।
संजय दास ने पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत का स्वागत किया है। उन्होंने इसे सनातन परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों की मजबूती बताते हुए उम्मीद जताई कि अब राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास को नई गति मिलेगी।
उन्होंने बताया कि जिस तरह राम मंदिर के निर्माण और अयोध्या के व्यापक विकास ने पूरे देश में धार्मिक पर्यटन को नया आयाम दिया है, उसी तरह गंगासागर में भी अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने निर्वाचित हुई नई सरकार से गंगासागर मेले को राष्ट्रीय मेला घोषित करने और कपिल मुनि मंदिर सहित पूरे क्षेत्र का सुनियोजित सुंदरीकरण कराए जाने की मांग की।
उनका मानना है कि यदि अयोध्या की तर्ज पर गंगासागर का विकास होता है, तो यह न केवल आस्था का केंद्र मजबूत करेगा बल्कि पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देगा।
आस्था का ऐतिहासिक संबंध
महंत संजय दास के अनुसार, अयोध्या और गंगासागर का रिश्ता केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि पौराणिक और ऐतिहासिक भी है। मान्यता के अनुसार, अयोध्या के इक्ष्वाकु वंश के राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ किया था, जिसका घोड़ा गंगासागर क्षेत्र तक पहुंचा। वहीं, कपिल मुनि के आश्रम में सगर के पुत्रों की कथा जुड़ी है, जिनकी मुक्ति के लिए राजा भगीरथ ने कठोर तप कर गंगा को पृथ्वी पर अवतरित कराया। कहा जाता है कि गंगा का सागर में संगम स्थल गंगासागर वही स्थान है, जहां सगर पुत्रों को मोक्ष प्राप्त हुआ। कपिल मुनि मंदिर में आज भी राजा सगर और भगीरथ की मूर्तियां इस ऐतिहासिक संबंध की साक्षी मानी जाती हैं।
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विकास और एकता की उम्मीद
पर्यटन मामलों के जानकार प्रोफेसर विनोद श्रीवास्तव के अनुसार, बंगाल में राजनीतिक बदलाव के बीच गंगासागर को लेकर उठी यह मांग अब एक बड़े विकास एजेंडे का संकेत है। अयोध्या और गंगासागर जैसे तीर्थों को जोड़ने से देशभर के श्रद्धालुओं के बीच सांस्कृतिक एकता मजबूत होगी। धार्मिक पर्यटन के जरिये पूर्वी भारत में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। अयोध्या से गंगासागर तक आस्था का यह सेतु अब विकास और सांस्कृतिक एकता की नई कहानी लिखने की ओर बढ़ता नजर आ रहा है।