अयोध्या। जिला अस्पताल में सरकारी धन को यहां-वहां खपाने की होड़ मची है। शायद वही वजह है कि निष्प्रयोज्य कार्यों के नाम पर सरकारी खजाना खाली किया जा रहा है। न्यू इमरजेंसी वार्ड में बनी माइनर ओटी भी इसका एक उदाहरण है। यह ओटी आज तक तो नहीं चल सकी, लेकिन न्यू इमरजेंसी वार्ड में बेड जरूर घट गए। बेड कम पड़ने से आए दिन यहां मारामारी रहती है।
जिला अस्पताल में पिछले वित्तीय वर्ष में मोटा बजट आया तो उसे खपाने के लिए अधिकारियों ने लंबा-चौड़ा प्लान बनाया। मरीजों की सुविधाओं का हवाला देते हुए व्यवस्था में सुधार के दावे करके कई कार्य कराए गए। इसके लिए धन भी खूब खर्च हुआ। आमजन को भी इन कार्यों से व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जगी, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। बल्कि इन कार्यों से अब नुकसान ही हो रहा है।
इमरजेंसी ओपीडी के बगल 12 बेड का न्यू इमरजेंसी वार्ड बना था। इसमें पार्टीशन करके अधिकारियों ने माइनर ओटी बना दी। जबकि, मेडिकल वार्ड, बच्चा समेत अन्य वार्डों के फुल होने से यह वार्ड काफी उपयोगी साबित होता था। पिछले वर्ष बुखार का प्रकोप बढ़ा तो यहां मरीजों को आसानी से बेड खोजे नहीं मिले। स्ट्रेचर पर या एक बेड पर दो-दो मरीजों को लेटाकर इलाज करना पड़ा था। ऐसे में इस वार्ड की अधिक उपयोगिता होने के बावजूद जिम्मेदारों ने इसे आधा कर दिया और माइनर ओटी बना दी।
केबिन बनाने से लेकर संसाधन दुरुस्त करने में भी काफी खर्च हुए। लगभग दो माह पहले ही यह बनकर तैयार हो चुकी है, लेकिन अभी तक इसका श्रीगणेश नहीं हो सका। इसके पीछे जिम्मेदारों ने दावा किया था कि यहां मरीजों के छोटे ऑपरेशन, ड्रेसिंग, प्लास्टर आदि होंगे। यह सुविधा तो मरीजों को नहीं मिल सकी, ऊपर से बेड जरूर घट गए। यदि पिछले वर्ष की तरह प्रकोप हुआ तो इस बार बेड को लेकर किल्लत और बढऩे की उम्मीद है।
-पहले के समय में किए गए कार्यों के बारे में कोई टिप्पणी नहीं कर सकते हैं। मानव संसाधन की कमी से माइनर ओटी नहीं शुरू हो सकी है। लेकिन वार्ड को सक्रिय करने की तैयारी की जा रही है।
-डॉ. अरुण प्रकाश श्रीवास्तव, प्रमुख अधीक्षक, जिला अस्पताल