चार साल पहले हुए भतीजे अर्जुन यादव की नृशंस हत्या के मामले में अदालत ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम सुरेंद्र मोहन सहाय ने दो सगे भाइयों और उनकी पत्नियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषियों पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है, जिसकी आधी राशि मृतक की मां को क्षतिपूर्ति के तौर पर दिए जाने का आदेश दिया गया है।
मृतक अर्जुन की मां कमलेश की तहरीर पर आरोपियों के खिलाफ हत्या सहित कई गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। हालांकि, विवेचना के दौरान भोला, शोभा और वंदना का नाम घटना में शामिल न होने के आधार पर निकाल दिया गया था।
केवल मोहन और सुषमा के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। कमलेश ने अदालत में भोला, शोभा और वंदना को तलब करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया, जिस पर सुनवाई के बाद वर्ष 2024 में न्यायालय ने उन्हें तलब किया। विचारण के दौरान वंदना को किशोर अपचारी घोषित कर उसकी पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई।
अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में नौ गवाह पेश किए। मृतक अर्जुन की मां ने बयान दर्ज कराया कि अर्जुन जब एक साल का था, तभी उसके पिता की मृत्यु हो गई थी और वह उनका इकलौता बेटा था। उन्होंने बताया कि पट्टीदारों ने जमीन की रंजिश में उनके पुत्र की हत्या की है।
यह घटना वर्ष 2022 की है, जब सात जून की सुबह छह बजे बीकापुर क्षेत्र के डढ़ियावा गांव में अर्जुन यादव अपने घर के सामने काम कर रहा था। तभी गांव के ही भोला, उनकी पत्नी शोभा, मोहन, उनकी पत्नी सुषमा और मोहन की पुत्री वंदना एक राय होकर आए।
उन्होंने अर्जुन से गाली-गलौज की और मना करने पर उस पर हमला कर दिया। मोहन ने कुल्हाड़ी, भोला ने फावड़े और शोभा ने गहदाला से वार किया, जबकि सुषमा और वंदना ने लात-घूंसों से पीटा। गंभीर रूप से घायल अर्जुन को पहले बीकापुर अस्पताल, फिर मेडिकल कॉलेज और अंत में ट्रामा सेंटर लखनऊ ले जाया गया, जहां उसकी मृत्यु हो गई।