तारुन। ग्राम पंचायत गरौली में एक ही आईजीआरएस शिकायत पर बीडीओ तारुन की ओर से दो अलग-अलग रिपोर्ट जमा करने का मामला सामने आया है। ऐसे में बीडीओ की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह शिकायत वर्ष 2021-22 की मनरेगा पत्रावलियों को ऑडिट के लिए उपलब्ध न कराने से संबंधित हैं, जो सुधीर तिवारी ने दर्ज कराई थी।
बीडीओ के हस्ताक्षर से 13 अप्रैल को जारी पहली रिपोर्ट में कहा गया है कि पंचायत सचिव ऋृषि प्रसाद की जांच में सभी पत्रावलियां रोजगार सेवक के पास सुरक्षित हैं। इसके बाद 21 अप्रैल को उसी मनरेगा पत्रावलियों से संबंधित दूसरी रिपोर्ट में बीडीओ ने फिर पंचायत सचिव ऋृषि प्रसाद की रिपोर्ट को आधार बनाया। इस दूसरी रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि तत्कालीन पंचायत सचिव माता प्रसाद से कोई अभिलेख प्राप्त नहीं हुआ, जिससे सूचना देना संभव नहीं है। माता प्रसाद अब गोंडा जिले में एडीओ को-ऑपरेटिव के पद पर तैनात हैं। बिना अभिलेखों के प्रभार लेने के कारण वर्तमान पंचायत सचिव ऋृषि प्रसाद भी सवालों के घेरे में हैं। बीडीओ अनुराग सिंह ने बताया कि तत्कालीन सचिव माता प्रसाद ने वर्तमान सचिव को मनरेगा से संबंधित अभिलेख नहीं दिए। पूर्व सचिव रहे माता प्रसाद बस्ती जनपद में सहायक विकास अधिकारी सहकारिता के पद पर कार्यरत हैं को अभिलेख देने के लिए पत्र निर्गत किया गया है। पूर्व में सचिव ऋषि प्रसाद की ओर से बताया गया था कि कुछ अभिलेख उनके पास है, इसलिए आईजीआरएस को निक्षेपित कर दिया गया था। दोबारा शिकायत पर सभी बिंदुओं की जांच की गई तो अभिलेख नहीं मिले।