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Ayodhya News: यूजीसी के शोध गंगा में अपलोड होंगी शोधार्थियों की थीसिस

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अयोध्या। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के डिजिटल संग्रह शोध गंगा में डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के शोधार्थियों को अब अनिवार्य रूप से अपने शोध प्रबंध अपलोड करने होंगे। इससे विभिन्न विषयों के पीएचडी उपाधि धारकों के शोध प्रबंधों की मौलिकता की परख हो सकेगी। साथ ही विश्वविद्यालय की रैंकिंग में भी सुधार होगा।
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विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रयासरत कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने इस दिशा में पहल की है। शोधगंगा शोध प्रबंधों का ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक भंडार है। यह इन्फ्लिबनेट केंद्र की ओर से स्थापित किया गया है। इनफ्लिबनेट अहमदाबाद की ऑनलाइन कंपनी है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के आदेश के अनुसार विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों के लिए अपने शोध प्रबंधों को इलेक्ट्रॉनिक रूप में भी जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है।

इंटरनेट पर उपलब्ध इस योजना का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय में विभिन्न विषयों में शोधपत्रों को ऑनलाइन उपलब्ध करवाना और पीएचडी जैसे विभिन्न शैक्षिक शोध प्रबंध में नकल की बढ़ती प्रवृत्ति पर लगाम लगाना है। शोधपत्रों के अध्ययन के लिए भारत में उपलब्ध यह सबसे अच्छी व्यवस्था है। यूजीसी की ओर से शुरू की गई शोध गंगा से अब अवध विश्वविद्यालय भी जुड़ेगा।
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इस योजना के तहत विश्वविद्यालयों के शोधपत्र ऑनलाइन किए जाते हैं, जिसके कारण किसी भी विश्वविद्यालय का शोधपत्र कहीं भी देखा जा सकता है। यूजीसी ने इनफ्लिब्नेट को ऑनलाइन रिसर्च मैटीरियल उपलब्ध करवाने का काम सौंपा है। इसके लिए अवध विश्वविद्यालय कंपनी को थीसिस सामग्री उपलब्ध करवाएगा। विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. राज नारायण पांडेय के अनुसार पीएचडी उपाधि प्राप्त करने के लिए शोध प्रबंध की सीडी भी यूजीसी को भी मुहैया करवानी होगी। यूजीसी की इस व्यवस्था को लागू करने के लिए विश्वविद्यालय को अलग से फंड भी उपलब्ध करवाया जा रहा है। इसके माध्यम से पीएचडी के सभी शोध पत्र वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे।
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