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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: कोर्ट में पेशी के बाद जेल भेजे गए आरोपी; 79 लाख बरामद, पांच से छह SBI कर्मी भी शामिल

Fri, 26 Jun 2026 05:05 PM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या

सार

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार सभी आरोपी कोर्ट में पेश किए गए। इस दौरान जिला न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद रही। आगे पढ़ें पूरी खबर... 
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: सभी आरोपी कोर्ट से जेल भेजे गए। - फोटो : अमर उजाला/संवाद न्यूज एजेंसी.
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विस्तार
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राम मंदिर के चढ़ावा चोरी के मामले में आठ आरोपियों को बृहस्पतिवार की देर शाम गिरफ्तार कर लिया गया। उनके पास से मंदिर के दान पात्र से चोरी हुए लगभग 79.85 लाख रुपये बरामद किए गए हैं। शुक्रवार की शाम लगभग चार बजे आरोपियों को न्यायालय से जेल भेज दिया गया।
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बीती छह जून को राम मंदिर की चढ़ावा धनराशि में से चोरी का मामला सामने आया था। बाद में मंदिर ट्रस्ट की सिफारिश पर प्रदेश सरकार ने एसआईटी गठित की। दो दिन पहले एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी। इसके बाद बृहस्पतिवार की शाम को मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने गणना में शामिल कर्मियों अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्रा व पर्यवेक्षणीय कर्मी सुभाष श्रीवास्तव व महासचिव चंपत राय के चालक रामशंकर उर्फ टिन्नू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी।

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रामजन्मभूमि थाने में दर्ज एफआईआर में कृष्ण मोहन ने बताया कि मंदिर में चढ़ावा धनराशि के गबन/चोरी के संबंध में एसआईटी गठित की गई थी। एसआईटी रिपोर्ट से यह तथ्य प्रकाश में आया है कि गणना प्रक्रिया में सेवारत कुछ कर्मियों ने भेंट/चढ़ावा धनराशि की चोरी की है। पर्यवेक्षणीय कार्य में लगे सुभाष श्रीवास्तव और बैंक पर्यवेक्षणीय कर्मी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की भूमिका भी प्रथमदृष्टया है। इसी आधार पर पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
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कोर्ट परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे

राम मंदिर परिसर में ही सभी आरोपियों को रात लगभग 8.00 बजे ही कस्टडी में ले लिया गया। उनसे पुलिस ने कई चरणों में पूछताछ की और शुक्रवार की दोपहर लगभग 2.00 बजे पुलिस लाइन स्थित अस्पताल ले जाया गया, जहां जिला अस्पताल के ईएमओ डॉ. आशीष पाठक और फार्मासिस्ट सर्वेश श्रीवास्तव की टीम ने उनका मेडिकल परीक्षण किया। इसके बाद दोपहर लगभग 03:30 बजे कचहरी ले जाया गया, जहां उन्हें रिमांड के बाद जेल भेज दिया गया। इस दौरान पुलिस थाने, राम मंदिर, पुलिस लाइन, जिला अस्पताल, कचहरी परिसर आदि स्थानों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे।

अपने ही कर्मियों का विवरण नहीं बता सके ट्रस्टी

राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने ही आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई लेकिन सभी आरोपियों के पिता के नाम व पते की उन्हें जानकारी नहीं थी। इस वजह से एफआईआर कॉपी में पिता के नाम और पते का कॉलम रिक्त रहा। गणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य में जुटे कर्मियों का भी पूरा विवरण ट्रस्ट के पास न होना भी घोर लापरवाही की श्रेणी में बताया जा रहा है। इसे लेकर भी तरह-तरह की चर्चा है।

 
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