अयोध्या। जिस खेत की मिट्टी ज्यादा क्षारीय होने से फसल की बढ़त रुकती है और खाद-पानी का असर कम होता है, उसी मिट्टी में फसल को ताकत देने वाले जीव मिले हैं।अयोध्या की क्षारीय और सोडिक मिट्टी से मिले इन पर जीवों पर अवध विश्वविद्यालय के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने शोध किया था। इसमें 95 तरह के बैक्टीरिया अलग किए गए, जिसमें 27 समूह और 44 प्रजातियों की पहचान हुई। 74 फीसदी से ज्यादा सैंपल की पहचान हो सकी।
शोध के लिए मिल्कीपुर, विवि परिसर और आसपास के खेतों से 5.5 से 11.5 सेंटीमीटर गहराई तक मिट्टी ली गई। लैब में अलग-अलग तकनीक से इन जीवों को अलग कर जांच की गई। इनमें से कई जीव पौधों की जड़ों के पास रहकर फसल को पोषक तत्व दिलाने में मदद कर सकते हैं। क्षारीय जमीन में जिंक, आयरन जैसे तत्व पौधों को नहीं मिल पाते। ऐसे में ये बैक्टीरिया फसल की जड़ बढ़ाने और पोषण पहुंचाने में सहायक हो सकते हैं। यह शोध माइक्रोबायोलॉजी विभाग के अजाद पटेल, रंजन सिंह, सोनी तिवारी, प्रशांत सिंह, आदर्श कुमार और आकांक्षा यादव और महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर के अभिषेक वशिष्ठ और गौतम कुमार मेघवंशी ने किया है।
तीन फीसदी नमक में भी जिंदा रहे जीव
शोधार्थियों के अनुसार, लैब टेस्ट में कुछ बैक्टीरिया तीन फीसदी नमक में भी जिंदा मिले। इससे लगता है कि इनमें नमक और क्षार सहने की ताकत है लेकिन अभी इन्हें सीधे खेत में डालने की बात कहना जल्दबाजी होगी। वैज्ञानिक अब देख रहे हैं कि खेत की असली मिट्टी और जड़ों के बीच ये कैसे काम करते हैं और फसल पर कितना असर डालते हैं।
पहचान के बाद खेत में होगा ट्रायल
वैज्ञानिक 44 प्रजातियों की पहचान के बाद अब गमले और फिर खेत में ट्रायल करेंगे। इससे पता चलेगा कि कौन सा जीव जड़ बढ़ाने, खाद को घोलकर पौधे तक पहुंचाने या क्षारीय जमीन में फसल को टिकाए रखने में मददगार है। ट्रायल के बाद ही तय होगा कि इनमें से किसे जैव उर्वरक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
2025 में शुरू हुआ था शोध
शोधार्थी के अनुसार क्षारीय मिट्टी पर यह अध्ययन 25 अक्तूबर 2025 को शोधपत्र प्राप्त होने से शुरू हुआ। 22 जनवरी 2026 को स्वीकृति मिली थी। शोध में प्यूडोमोनास, बैसिलस, एंटरोबैक्टर, एग्रोबैक्टीरियम, स्ट्रेप्टोमाइसीज, क्लेबसिएला और ओक्रोबैक्टर जैसे जीनस से जुड़े बैक्टीरिया मिले। शोध में इन सूक्ष्मजीवों को क्षारीय मिट्टी में पौधों की बढ़वार और पोषक तत्वों की उपलब्धता के लिहाज से संभावित उपयोगी बताया गया है। आगे और शोध किया जाएगा।