अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट दान में मिलने वाले सोने और चांदी की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार की टकसाल (मिंट) के साथ अपना करार आगे भी जारी रखेगा। ट्रस्ट ने इस कार्य के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की सहायक संस्था इंडिया गवर्नमेंट मिंट के साथ एमओयू किया है, जिसके तहत मंदिर को प्राप्त होने वाले बहुमूल्य धातुओं की वैज्ञानिक तरीके से जांच और प्रमाणन कराया जाता है।
ट्रस्ट के सूत्रों के अनुसार पहले चरण में करीब 20 किलो चांदी और 13 किलो सोने की शुद्धता की जांच टकसाल में कराई जा चुकी है। जांच के बाद प्रमाणित होने वाले सोना-चांदी का रिकॉर्ड ट्रस्ट के अभिलेखों में दर्ज किया जाता है, जिससे दान की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहती है।
राम मंदिर में प्रतिदिन देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं अर्पित करते हैं। ऐसे में उनकी वास्तविक शुद्धता और वजन का प्रमाणित आकलन आवश्यक होता है। इसी उद्देश्य से ट्रस्ट ने सरकारी संस्था की सेवाएं ली हैं।
ट्रस्ट का मानना है कि सरकारी टकसाल से जांच कराने की व्यवस्था से दान में प्राप्त सोने-चांदी का सटीक मूल्यांकन होगा और मंदिर की वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता एवं जवाबदेही और मजबूत होगी।
यह है मिंट (टकसाल) का काम
इंडिया गवर्नमेंट मिंट भारत सरकार की अधिकृत संस्था है, जो सिक्कों की ढलाई, स्वर्ण एवं रजत पदकों का निर्माण, स्मारक सिक्के तैयार करने के साथ-साथ बहुमूल्य धातुओं की शुद्धता की वैज्ञानिक जांच और प्रमाणन का कार्य करती है। यह संस्था आधुनिक उपकरणों के माध्यम से सोने-चांदी की शुद्धता का परीक्षण कर प्रमाणपत्र जारी करती है। इसी कारण ट्रस्ट ने दान में प्राप्त बहुमूल्य धातुओं की जांच के लिए इसी सरकारी संस्था को अधिकृत किया है।