अयोध्या। जिला अस्पताल में जांघ का ऑपरेशन कराने वाले मरीज को भी स्वयं के हेपेटाइटिस-सी संक्रमित होने की पहले ही जानकारी थी। अस्पताल में घूमने वाले दलालों व लैब के कर्मचारियों की मिलीभगत से हेपेटाइटिस-सी की निगेटिव रिपोर्ट ऑपरेशन कराने के लिए बनवाई गई थी। मामले की जांच के दौरान होने वाले खुलासों से लैब प्रभारी समेत स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका संदिग्ध लग रही है।
जिला अस्पताल में 27 जुलाई को एक मरीज के जांघ का ऑपरेशन हुआ था। ऑपरेशन के बाद मरीज के हेपेटाइटिस-सी संक्रमित होने की जानकारी मिली। जबकि मरीज की जिला अस्पताल से जारी जांच रिपोर्ट रिपोर्ट में उसे निगेटिव बताया गया था। मुद्दे को अमर उजाला ने उठाया तो मामले की जांच कराई जा रही है। जांच टीम ने मरीज का बयान दर्ज किया तो एक-एक चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं।
जांच के दौरान पता चला कि मरीज को एक साल पहले ही फ्रैक्चर हुआ था। उस समय परिजनों ने आरटीओ कार्यालय के पास स्थित एक नर्सिंग होम में ऑपरेशन कराने के लिए संपर्क किया था। ऑपरेशन के लिए जांच कराई गई तो मरीज संक्रमित मिला। उसके संक्रमित होने के कारण ऑपरेशन में लगभग ढाई लाख रुपये खर्च बताया गया। परिजन उस समय सक्षम नहीं थे तो उन्होेंने इंतजार किया। इसके बाद जिला अस्पताल से सांठगांठ करके निगेटिव रिपोर्ट बनाई गई और ऑपरेशन करवाया गया।
इसमें अस्पताल के लैब टेक्नीशियन व कर्मचारियों की मिलीभगत की पूरी उम्मीद है। जवाबदेही व भूमिका तय करने के लिए टीम अभी मामले की जांच कर रही है। उस समय के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले गए हैं। पैथोलॉजिस्ट की निगरानी में लापरवाही भी सामने आ रही है। हालांकि, जांच टीम अभी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची है और बयान दर्ज करने का दावा किया जा रहा है।
गलत तरीके से जांच रिपोर्ट जारी करने के मामले की जांच अभी चल रही है। इसमें कई गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित चिकित्सक या कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
-डॉ. उत्तम कुमार, प्रमुख अधीक्षक, जिला अस्पताल