अयोध्या। न्यायालय में आरोपी मोईद खान के अधिवक्ताओं के कई तर्कों के जवाब नहीं मिले। विवेचना में घटनास्थल मोईद की बेकरी नहीं साबित हुई, बल्कि घटनास्थल बेकरी से काफी दूर पाया गया। इन्हीं तमाम तर्कों की वजह से मोईद खान पर आरोप साबित नहीं हुए और वह बरी हो गए।
न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष से 13 गवाह परीक्षित कराए गए। लंबी बहस के दौरान मोईद अहमद की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने जब अदालत में तर्क रखना शुरू किए तो अभियोजन पक्ष कोई जवाब नहीं रख सका। मोईद के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि प्रथम सूचना रिपोर्ट में घटनास्थल बेकरी बताया गया है, जबकि विवेचना के दौरान घटनास्थल बेकरी से काफी दूर दिखाया गया है। सामूहिक दुष्कर्म का वीडियो जिस मोबाइल से बनाया जाना कहा गया, उसकी फॉरेंसिक जांच में पुष्टि नहीं हुई।
पीड़िता ने मजिस्ट्रेट को दिए गए बयान में राजू खान के साथ मोहित का नाम लिया था। पुलिस के दबाव में पीड़िता का बयान मजिस्ट्रेट के सामने फिर से कराया गया, जिसमें मोईद खान का नाम बताया गया। पीड़िता ने मजिस्ट्रेट को दिए गए पहले बयान में जिस मोहित का नाम लिया गया था, वह पीड़िता की बहन का देवर है और पड़ोस में रहता है।
बचाव पक्ष से मोहित के निवास का प्रमाण व मतदाता पहचान पत्र अदालत में पेश किया गया। पीड़िता के डीएनए की जांच में भी मोईद अहमद के विरुद्ध कोई अपराध नहीं पाया गया। मोईद की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं ने उन्हें निर्दोष बताते हुए राजनीति के तहत फर्जी फंसाने का तर्क देते हुए दोषमुक्त करने की मांग की।
इनसेट
एक माह तक छावनी में तब्दील था भदरसा, कार्रवाइयों की प्रदेश भर में रही चर्चा
29 जुलाई, 2024 को यह मामला पूराकलंदर थाने में दर्ज हुआ था। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रकरण को सदन में उठाया था, जिससे मामला चर्चा में आया। पुलिस ने तत्कालीन थानाध्यक्ष रतन शर्मा व बीट सिपाही को सस्पेंड कर दिया था। इसके बाद आरोपी मोईद खान पर कार्रवाई शुरू हुई। लगभग एक माह तक भदरसा कस्बा छावनी में तब्दील रहा। मोईद के कई निर्माण जमीदोज किए गए। यह कार्रवाईयां प्रदेश भर में चर्चा में रहीं।
भदरसा चेयरमैन पर भी दर्ज हुई थी रिपोर्ट
दुष्कर्म पीड़िता को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। नगर पंचायत भदरसा के चेयरमैन मोहम्मद राशिद सपा नेता जय सिंह राणा के साथ जिला महिला अस्पताल गए थे। इस बीच एक व्यक्ति ने मोहम्मद राशिद और जय सिंह राणा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। आरोप लगाया कि वह मामले में सुलह करने के लिए पीड़िता के परिजनों पर दबाव बना रहे थे। इसी मामले में राशिद के शस्त्र लाइसेंस को निरस्त करने की कार्रवाई हुई। इस पर समाजवादी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी।