अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के समर्थन में बजरंग दल के पूर्व राष्ट्रीय संयोजक प्रकाश शर्मा खुलकर सामने आए हैं। अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि यदि कोई कर्मचारी गलती करता है तो उसके लिए शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति को दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं है। अगर सिपाही कोई गलती करता है तो आईजी को सस्पेंड नहीं कर दिया जाता।
उन्होंने कहा कि चढ़ावा चोरी की घटना हुई है, इसमें कोई संदेह नहीं है। दोषियों पर कार्रवाई भी हो रही है, लेकिन पूरे प्रकरण को इस तरह पेश किया जा रहा है, मानो चंपत राय का दशकों का त्याग, तपस्या और समर्पण कोई मायने ही नहीं रखता। प्रकाश शर्मा ने आरोप लगाया कि राम मंदिर को लेकर नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। अब जब भव्य मंदिर बन गया है तो चोरी की घटना को केंद्र में रखकर पूरे आंदोलन और उसके नेतृत्व को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है।
चंपत राय पर उठ रहे सवालों को लेकर उन्होंने कहा कि चंपत राय पर आया यह संकट संयोग नहीं है। इसके पीछे वे लोग हैं जो चाहते थे कि राम मंदिर में वीआईपी दर्शन के लिए शुल्क लिया जाए या सीईओ की नियुक्ति के जरिये व्यवस्थाओं का स्वरूप बदला जाए। चंपत राय ने ऐसे प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया। आज जब राम मंदिर विश्व का प्रमुख आस्था केंद्र बन चुका है तो उन्हीं पर लांछन लगाए जा रहे हैं।
दान के आभूषणों की शुद्धता जांचना जिम्मेदारी
सोने-चांदी के दान के गायब होने को लेकर उठे सवालों पर प्रकाश शर्मा ने कहा कि जब श्रद्धालु रामलला के लिए सोने-चांदी के आभूषण दान करते हैं तो वे कोई प्रमाणपत्र या रसीद नहीं देते कि धातु पूरी तरह शुद्ध है। ऐसे में ट्रस्ट बिना परीक्षण के उसे कैसे स्वीकार कर सकता है। इसी कारण ट्रस्ट की ओर से सोने-चांदी की शुद्धता की जांच भारत सरकार के टकसाल (मिंट) में कराई जाती है। यह पूरी तरह पारदर्शी और आवश्यक प्रक्रिया है। जिनके गायब होने की बात की जा रही थी, उसे सामने रख दिया गया है।