अयोध्या। रामनगरी में रिंग रोड परियोजना तेजी से आकार ले रही है। परियोजना के लिए जिले में सात गांवों की कुल 18 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना था, जिनमें से अब तक चार गांव की 12 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जा चुका है। तीन गांव की छह हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण की कार्रवाई चल रही है। वहीं रिंग रोड पर पहला फ्लाई ओवर बनकर तैयार हो चुका है।
अयोध्या-अंबेडकरनगर हाईवे पर यश पेपर मिल के पास पहला फ्लाईओवर लगभग बनकर तैयार है, अब केवल फिनिशिंग का काम बाकी है। वहीं रिंग रोड के लिए शेष जमीनों के अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। लगभग 3418 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस 67.50 किलोमीटर लंबे और 60 मीटर चौड़े रिंग रोड पर सात फ्लाईओवर, चार रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी), 16 वाहन अंडरपास, 11 मेजर ब्रिज और 18 माइनर ब्रिज का निर्माण शामिल है। इसके अलावा सरयू नदी पर दो भव्य पुलों का निर्माण भी प्रस्तावित है, जो अयोध्या को बस्ती और गोंडा से जोड़ेंगे। दोनों पुलों का निर्माण शुरू हो चुका है, इनके निर्माण का 40 फीसदी काम पूरा हो चुका है। वहीं ग्राम हरिपुर जलालाबाद, हुंसेपुर, रायपुर मनापुर और खरगापुर में एम्बैंकमेंट (बंधा) निर्माण कार्य निरंतर प्रगति पर है।
एडीएम भूमि एवं अध्याप्ति कौशल कुमार ने बताया कि अब तक घटरौली, मगलसी उपहार, खानपुर मसौधा व भदोखर की कुल 12 हेक्टेयर जमीन अधिगृहीत की जा चुकी है। जबकि सोफिया पारा, पारा खान व समाहा खुर्द की छह एकड़ जमीन जल्द अधिगृहीत कर ली जाएगी। यह परियोजना न केवल अयोध्या की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगी, बल्कि पर्यटन और आर्थिक विकास को भी नई गति प्रदान करेगी।
स्थानीय व्यापार और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
3418 करोड़ रुपये की इस परियोजना का अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। रिंग रोड के निर्माण से न केवल यातायात की भीड़ भाड़ कम होगी, बल्कि स्थानीय व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन के बाद से तीर्थ यात्रियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में यह रिंग रोड तीर्थ यात्रियों के लिए सुगम और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करेगा। साथ ही यह परियोजना स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा करेगी।