02- रामकथा संग्रहालय की डिजाइन- संवाद
अयोध्या। रामकथा संग्रहालय में श्रद्धालुओं को रामायण युग की अनुभूति होगी। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहल पर राम वन गमन गैलरी की पटकथा में बड़ा बदलाव किया जाएगा। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के सुझाव पर नई रूपरेखा तैयार की जा रही है। इससे वनगमन का प्रसंग पहले से कहीं अधिक जीवंत और भावनात्मक नजर आएगा।
नई पटकथा में वह दृश्य रचे जाएंगे, जहां मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का ऋषि-मुनियों से संवाद, वन में उनके चरण पड़ने की पवित्र आभा और प्रकृति के उस दिव्य परिवेश को विजुअल रूप में दर्शाया जाएगा। आगंतुकों को ऐसा लगेगा मानो वह स्वयं राम के साथ वनपथ पर चल रहे हों। रास्ते में वृक्षों की छाया है, सरयू की ध्वनि है और ऋषियों की वाणी गूंज रही है। रामकथा संग्रहालय के निदेशक डॉ. संजीव सिंह ने बताया कि संग्रहालय में ऐसे तत्व जोड़े जा रहे हैं, जिनसे रामायण युग की अनुभूति सजीव हो उठे। संवाद, ध्वनि और प्रकाश के संयोजन से तैयार यह प्रस्तुति न केवल दर्शन कराएगी बल्कि भक्ति और भावनाओं का संगम भी रचेगी।
उन्होंने बताया कि चंपत राय के सुझाव पर श्रीराम के वन गमन के दौरान ऋषि-मुनियों से मुलाकात का दृश्य इस तरह से प्रस्तुत किया जाएगा कि वह जीवंत लगेगा। ऋषियों से श्रीराम की बात का प्रसंग ऑडियो के रूप में प्रसारित किया जाएगा। वन गमन के दौरान श्रीराम भगीरथ आश्रम, वाल्मीकि, अगस्त्य ऋषि से मिलते हैं, उनके साथ संवाद को प्रस्तुत किया जाएगा।
पटकथा लिखने में ली शास्त्रीय ग्रंथों की मदद
डॉ. संजीव सिंह ने बताया कि रामकथा संग्रहालय में कुल 20 गैलरी बन रही है। जिसमें से चार गैलरी पहले से ही निर्मित है, बाकी 16 गैलरियों की पटकथा तैयार हो गई है। पटकथा लिखने के लिए शास्त्रीय ग्रंथों जैसे वाल्मीकि रामायण, अध्यात्म रामायण व आनंद रामायण का संदर्भ लिया गया है। एक गैलरी में देवताओं के ध्वज के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। देवताओं के ध्वज की जानकारी के लिए आनंद रामायण का गहन अध्ययन किया गया।