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Ayodhya News: जिले को मिलेंगी तीन ट्रूनाॅट मशीन, क्षय रोगियों की होगी जांच

Wed, 23 Jul 2025 09:11 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
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अयोध्या। क्षय रोगियों की जांच के लिए जिले के तीन और ट्रूनॉट मशीन मिलने की उम्मीद है। इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है, जिस पर मुहर लगने की उम्मीद है। इन्हें मशीन विहीन चल रहे तीन ब्लॉकों पर स्थापित किया जाएगा, जिससे वहां के मरीजों को लंबी भागदौड़ से निजात मिलेगी।
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किसी मरीज में टीबी की पुष्टि के लिए तीन तरह की जांच होती है। बलगम न निकलने वाले मरीज का एक्सरे कराया जाता है। अगले चरण में माइक्रोस्कोपी जांच होती है, जो कि पुरानी पद्धति हो चुकी है। इस पद्धति से एक मिली लीटर सैंपल में यदि 10 हजार बैक्टीरिया होते हैं, तभी रोग की पुष्टि हो पाती है। इस कारण कई बार लोग टीबी के साथ जीवन गुजारने को विवश होते थे। आधुनिक तकनीक पर आधारित ट्रूनॉट और सीबी नॉट मशीन से कम समय में बेहतर परिणाम सामने आते हैं।
जिले के खंडासा, मवई और हैरिंग्टनगंज ब्लॉक पर ट्रूनॉट मशीन नहीं है। वहां के मरीजों को जिला मुख्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है। इससे निजात के लिए बीते माह शासन से छह ट्रूनॉट मशीन मांगी गई थी, जिसमें तीन के मिलने की उम्मीद है। इसके लिए शासन स्तर से एलटी व अन्य स्टाफ का विवरण मांगा गया है।
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इनसेट
इन जगहों पर पहले से स्थापित है मशीन
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. संदीप शुक्ला ने बताया कि अब तक सीएचसी रुदौली और राजकीय टीबी क्लीनिक पर सीबी नॉट मशीन स्थापित है। जबकि, पूरा बाजार, मया बाजार और तारुन में यूनो ट्रूनॉट मशीन है, जिससे एक बार में एक ही मरीज की जांच हो पाती है। बीकापुर, मवई, मेडिकल कॉलेज और मिल्कीपुर में डुओ मशीन है, जिससे एक बार में दो सैंपल लगते हैं। जबकि, सोहावल में क्वांटो मशीन है, जिससे चार लोगों का सैंपल लिया जाता है। तीनों नई मशीनें डुओ पद्धति पर आधारित हैं, जिनसे एक शिफ्ट में दो-दो मरीजों की जांच हो सकेगी।

शासन की ओर से अब तक 138 लोगों की प्रतिदिन टीबी जांच का लक्ष्य तय किया गया है। इन मशीनों के लगने से रोज 12 और मरीजों की जांच हो सकेगी। इस तरह माह में दोनों शिफ्टों में जांच होती रहे तो 360 रोगियों को फायदा मिलेगा।

मेडिकल कॉलेज के बाहर एक निजी पैथोलॉजी संचालित करने वाले रजनीश मिश्रा ने बताया कि जिले के लगभग किसी केंद्र पर सीबीनॉट या ट्रूनॉट मशीन स्थित है। कुछ बड़े पैथोलॉजी पर सैंपल लेकर बाहर भिजवाया जाता है, जहां लगभग ढाई से तीन हजार रुपये तक लगते हैं।
सीएमओ डॉ. सुशील कुमार बानियान ने बताया कि ट्रूनॉट मशीन से एक मिलीलीटर में 173 बैक्टीरिया होने पर रोग की पुष्टि हो जाती है। साथ ही टीबी के प्रकार की जानकारी भी मिलती है। उसी आधार पर इलाज किया जाता है। मशीनों के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, स्वीकृति मिलने पर स्थापित कराया जाएगा।
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