फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ayodhya News: जिला अस्पताल की लैब का खेल, साल भर में बदल दिया ब्लडग्रुप

Sun, 19 Apr 2026 08:55 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
विज्ञापन
विज्ञापन
अयोध्या। जिला अस्पताल की इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ प्रयोगशाला की बड़ी लापरवाही सामने आई है। एक युवक का साल भर के भीतर रक्त समूह ही बदल दिया गया। युवक ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
विज्ञापन


शहर के अश्विनीपुरम कॉलोनी निवासी अनुज श्रीवास्तव (40) हर वर्ष अमरनाथ यात्रा पर जाते हैं। उन्होंने पंजीकरण के लिए गत वर्ष जिला अस्पताल से जांच कराई थी। तब उनका रक्त समूह ए धनात्मक और हीमोग्लोबिन 7.9 बताया गया था। हीमोग्लोबिन स्तर पर संदेह होने पर उन्होंने फतेहगंज सड़क की एक निजी प्रयोगशाला से जांच कराई। 24 घंटे के भीतर निजी प्रयोगशाला ने हीमोग्लोबिन का स्तर 14.6 बताया। यह बड़ा अंतर अस्पताल की जांच पर सवाल उठाता है।


अनुज ने अमरनाथ यात्रा के पंजीकरण के लिए दोनों बार जांच कराई थी। गत वर्ष जिला अस्पताल की प्रयोगशाला ने उनका रक्त समूह ए पॉजिटिव बताया था। साथ ही हीमोग्लोबिन का स्तर 7.9 दर्ज किया था। निजी प्रयोगशाला में जांच कराने पर हीमोग्लोबिन का स्तर 14.6 पाया गया। इस बड़े अंतर से अस्पताल की रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
विज्ञापन

इस बार वह फिर से यात्रा पर जाने की तैयारी में है। इसके लिए उन्होंने 13 अप्रैल को जिला अस्पताल की लैब में दोबारा नमूना दिया। इस बार हीमोग्लोबिन का स्तर तो 14 बताया गया, लेकिन उनका ब्लडग्रुप ओ पॉजिटिव आ गया। साल भर के भीतर उसी लैब से ब्लडग्रुप बदलने की रिपोर्ट से उनका माथा ठनक गया। उन्होंने पर इस पर आपत्ति जताई तो संबंधित कर्मचारी उनसे बहस करने लगे और इसी रिपोर्ट के सही होने का दावा किया।

गलत इलाज का था खतरा
अनुज ने कहा कि आपात स्थिति में इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर यदि इलाज करा लिया जाए तो गंभीर परिणाम भुगतना पड़ सकता है। सिर्फ उनकी ही दो रिपोर्ट में इस तरह की गड़बड़ी सामने आई है। इस तरह अन्य रोगियों की जांच रिपोर्ट में भी लापरवाही संभव है। इस पर अंकुश लगाने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि सरकारी लैब की विश्वसनीयता बनी रहे।
इनसेट
एक ही रहता है ब्लडग्रुप
विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में किसी भी व्यक्ति का ब्लडग्रुप जीवन भर एक सा ही रहता है। यह गड़बड़ी सिर्फ लापरवाही या त्रुटिपूर्ण जांच से ही संभव है। ऐसे मामलों में संबंधित को किसी अन्य लैब से भी प्रमाणित जांच कराना चाहिए।
वर्जन...
प्रमुख अधीक्षक डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि लैब में पैथोलॉजिस्ट की निगरानी में जांच होती है। तीबयत खराब होने के कारण वह पिछले कई दिन से अवकाश पर हैं। सोमवार को कार्यभार ग्रहण करने के बाद इस मामले की जानकारी लेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें