शुजागंज/रुदौली। सरयू का जलस्तर भले ही तेजी से घट रहा हो, लेकिन बाढ़ की तबाही अभी थमी नहीं है। पानी उतरते ही नदी ने कटान तेज कर दिया है। पटरंगा मांझा में खेतों की जमीन और खड़ी फसलें नदी की धारा में समा रही हैं। बाढ़ प्रभावित आठ गांवों में हजारों एकड़ फसल बर्बाद होने से किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। पटरंगा मांझा के किसान राजेंद्र के मुताबिक, गांव की करीब 50 बीघा जमीन नदी में समा चुकी है।
बाढ़ का असर खेती तक सीमित नहीं है। मरौचा मांझा में संक्रमण की आशंका को देखते हुए डॉक्टरों ने दवाएं बांटी हैं और पशुओं का टीकाकरण कराया गया है। कैथी मांझा में बच्चों की पढ़ाई ठप है। संपर्क मार्ग कट जाने से ग्रामीणों का आवागमन भी प्रभावित है। पशुओं के लिए हरे चारे का संकट खड़ा होने पर प्रशासन ने भूसे का वितरण कराया है। एसडीएम रुदौली विनोद कुमार गुप्ता ने बताया कि प्रभावित गांवों में राहत सामग्री बांटी जा रही है। पानी घटने के बाद फसलों के नुकसान का विस्तृत सर्वे कराया जाएगा।
खेतों में बचा कुछ नहीं, किसानों ने मांगा मुआवजा
किसानों के अनुसार बाढ़ से करीब 90 फीसदी धान और 50 फीसदी गन्ने की फसल खराब हो गई है। कई खेतों में धान पूरी तरह चौपट हो चुका है। मरौचा के रामभवन और महंगू पुरवा के पवन कुमार ने बताया कि उनकी धान की फसल पूरी तरह खराब हो गई। देवराज की सात बीघा, रामदेव की आठ बीघा और कुंवारा देवी की नौ बीघा धान की फसल भी बाढ़ की भेंट चढ़ गई। किसानों ने प्रशासन से तत्काल स्थलीय सर्वे कराकर नुकसान का आकलन करने और नियमानुसार मुआवजा दिलाने की मांग की है।