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Ayodhya News: पगलाभारी धमाके में दूसरी मौत, एक ही हालत गंभीर

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पगलाभारी गांव में धमाका होने वाले स्थान पर पहुंच कर हादसे की वजह तलाशते ग्रामीण।  -संवाद
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हनुमतनगर/अयोध्या। पूराकलंदर थाना क्षेत्र के पगलाभारी गांव में शनिवार शाम आटा चक्की संचालक रामकुमार गुप्ता के घर हुए धमाके में उसकी मां शिवपता (65) की भी मौत हो गई। इस हादसे में यह दूसरी मौत है। इसके अलावा 90 फीसदी झुलस चुकी रामकुमार की पत्नी बिंदू को भी लखनऊ रेफर कर दिया गया। उनकी भी जान खतरे में है।
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उधर, इसी धमाके में एक दिन पहले जान गंवाने वाली युवती प्रियंका के शव का पोस्टमार्टम रविवार सुबह डॉक्टरों के पैनल किया है। गम व आक्रोश के बीच देरशाम भरतकुंड में शव का अंतिम संस्कार किया गया।

पगलाभारी गांव में हुए धमाके के बाद गिरे मकान की चपेट में आकर युवती प्रियंका की मौके पर ही मौत हो गई थी। आटा चक्की संचालक समेत उनके परिवार के छह लोग घायल हो गए थे। हालत गंभीर होने पर शिवपता को लखनऊ रेफर कर दिया गया था।
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समय पर लखनऊ ले जाने के लिए कोई तीमारदार न होने पर लगभग दो घंटे तक वह इमरजेंसी में पड़ी तड़पती रहींं। बाद में एक रिश्तेदार उन्हें लेकर लखनऊ गए, जहां देररात उन्होंने दम तोड़ दिया। अन्य सभी घायलों का इलाज अभी जिला अस्पताल में चल रहा है।
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दीवारों पर दिखे बारूद के निशान, सिलिंडर फटने के दावों पर आक्रोश
आटा चक्की संचालक के मकान में हुए तेज धमाकों के बाद ढहे मकान की चपेट में आकर युवती की मौत के मामले में ग्रामीणों व परिजनों में आक्रोश है। सिलिंडर फटने से हुए विस्फोट के दावे सामने आने पर रविवार को गांव की महिलाएं काफी संख्या में घटनास्थल पर एकत्र हो गईं। महिलाओं ने पुलिस-प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए साक्ष्य छिपाने के आरोप लगाए। सभी बारूद से विस्फोट होने के दावा करते हुए आटा चक्की संचालक पर कड़ी कार्रवाई की मांग करती रहीं।

हालांकि, घटना के बाद से गांव में सन्नाटा पसरा है। शांति व्यवस्था के लिए पुलिस तैनात की गई है। रविवार सुबह मृतका के घर पर रिश्तेदारों व ग्रामीणों का मजमा लगा रहा। युवती की मौत का जितना उनमें गम था, उससे कहीं घटना को लेकर गुस्सा दिख रहा था। घटना के वास्तविक कारणों पर पर्दा डालने की कोशिश आग में घी का काम रही थी।

दोपहर में आक्रोश इस कदर बढ़ा कि महिलाएं घटनास्थल पर इकट्ठा हो गईं। रातोरात मलबे को जेसीबी से उठवाकर सड़क पर फेंकवाने की भी निंदा करती रहीं। रामलली ने कहा कि इतनी क्या जल्दी थी कि रात में ही मलबा उठवाकर फेंकवा दिया गया। सुबह तक इंतजार कर लेते तो ग्रामीणों को भी सच्चाई पता चल जाती कि हादसा कैसे हुआ है। दीवारों पर भी बारूद के निशान दिख रहे हैं।

ग्रामीण संतराम ने कहा कि बार-बार हादसा हुआ है। ग्रामीणों ने भी इसका विरोध किया है। थोड़ी दूर पर ही पुलिस थाना है। इसके बावजूद पुलिस को भनक नहीं लगी। मामले में लीपापोती करने के लिए कहानी गढ़ी जा रही है। इसी तरह काफी संख्या में जमा ग्रामीण घटना की निंदा करते हुए आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते रहे।

हमारी तो दुनिया उजाड़ डाली
हादसे में युवती की मौत के बाद परिजन दोपहर तक शव का इंतजार करते रहे। जैसे-जैसे समय बीत रहा था, परिजनों के आंसू तो सूख रहे थे लेकिन चीख-पुकार, सिसकियों में बदल रही थीं। गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा था। घटनास्थल पर चीखते हुए मृतका की बुआ फूलकुमारी ने कहा कि हमारी तो दुनिया उजाड़ डाली। इन्साफ करने वाला कोई नहीं हैं।

फोरेंसिक टीम ने दूसरे दिन भी लिए नमूने
हादसे के दूसरे दिन रविवार को भी पुलिस व फोरेंसिक टीम घटनास्थल पर पहुंची और सड़क पर फेंके गए मलबे से नमूने लिए। घटनास्थल को पूरी तरह सील कर दिया गया है। जमींदोज हो चुके मकान के भीतर जाने से पुलिस के जवान रोकते रहे।

बाल-बाल बचे पड़ोसी, दीवार व शौचालय क्षतिग्रस्त
रामकुमार के पड़ोसी रमेश कुमार ने बताया कि उनका परिवार घटना के समय थोड़ी दूरी पर था। अन्यथा बड़ी जनहानि हो सकती थी। रामकुमार के मकान से सटी उनकी दीवार भी विस्फोट के बाद क्षतिग्रस्त हो गई। बगल में बना उनका शौचालय भी ढह गया।
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