अयोध्या। सूर्योदय से पहले ही अयोध्या की गलियों में आस्था की पदचाप सुनाई देने लगी थी। माथे पर चंदन-रोली, हाथ में प्रसाद और हृदय में विश्वास लिए श्रद्धालुओं का सैलाब हनुमान गढ़ी की ओर बढ़ चला। मंदिर की 76 सीढ़ियां किसी तपोमार्ग की भांति प्रतीत हो रही थीं, जिन्हें चढ़ते हुए हर कोई एक नई ऊर्जा, एक नई चेतना का अनुभव कर रहा था।
यह मनमोहक, आस्था से लबरेज दृश्य ज्येष्ठ माह के चौथे मंगलवार पर अयोध्या की सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी का था। हनुमान गढ़ी मंदिर में इस अवसर पर भगवान हनुमान का विशेष शृंगार किया गया। चंदन, गुलाब और केसर की सुगंध से मंदिर परिसर महक उठा। फूलों से सजे दरबार में हनुमंतलला ऐसे प्रतीत हो रहे थे, मानो स्वयं भक्तों के कष्ट हरने को सशरीर पधारे हों। भक्तों की ओर से सामूहिक रूप से किए गए सुंदरकांड और हनुमान चालीसा के पाठ ने पूरे वातावरण को भक्तिरस से भर दिया। सुबह से लेकर रात की आरती तक भक्तों की जुटी भीड़ को नियंत्रित करने में प्रशासन को भी काफी मशक्त करना पड़ी।इसके साथ ही वीर भगवान मंदिर, सहादतगंज स्थित हनुमानगढ़ी, देवकाली हनुमानगढ़ी, रिकाबगंज हनुमानगढ़ी सहित शहर के हनुमान मंदिरों में भी दिनभर भक्तों की कतार लगी रहे। हनुमान मंदिरों में जयकारे गूंजते रहे
पौराणिक पीठ नाका हनुमानगढ़ी भी ज्येष्ठ मास के चौथे मंगलवार पर भक्तों से गुलजार रहा। पीठ के महंत रामदास के संयोजन में सुबह रत्नों एवं आभूषणों से हनुमान जी का भव्य शृंगार किया गया। वैदिक पंडितों ने हनुमान चालीसा पाठ किया। वहीं हनुमंत लला को विभिन्न प्रकार के फलों का भोग लगाया गया। शाम को सामूहिक सुंदरकांड पाठ के जरिए भक्तों ने हनुमंत लला से सुख समृद्धि की विनती की।