कभी अपने संकल्प से समझौता नहीं किया
विहिप प्रवक्ता शरद शर्मा बताते हैं कि संघ और भाजपा के लिए वर्ष 2002 से 2014 का दौर राजनीतिक और वैचारिक रूप से चुनौतीपूर्ण माना जाता है। उस समय भी राम मंदिर निर्माण की आवाज को बुलंद रखने वाले प्रमुख संत नेताओं में डॉ. रामविलास दास वेदांती अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे। कठिन परिस्थितियों, राजनीतिक दबावों और कानूनी संघर्षों के दौर में भी उन्होंने कभी अपने संकल्प से समझौता नहीं किया।
इस दौर में जब मंदिर मुद्दा राजनीतिक हाशिये पर धकेलने की कोशिशें हो रही थीं, तब डॉ. वेदांती ने संत समाज और राम भक्तों को निरंतर जागृत किया। अयोध्या में धरना–प्रदर्शन, संत सभाएं, धर्मसभाएं और प्रवचनों के माध्यम से उन्होंने यह स्पष्ट संदेश दिया कि राम मंदिर केवल चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्र की सांस्कृतिक अस्मिता का प्रश्न है।