फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राम मंदिर चढ़ावा चोरी: ट्रस्ट के पूर्व महासचिव अब आरोपियों के खिलाफ अदालत में देंगे गवाही, गवाह बनेंगे चंपत

Thu, 24 Sep 2026 06:25 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या

सार

राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस ने कुल 133 गवाह बनाए हैं। मुकदमे का ट्रायल शुरू होने के बाद इन गवाहों के बयान अदालत में दर्ज होंगे। पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव को पुलिस ने आरोपी नहीं, बल्कि गवाह बनाया गया है।
विज्ञापन
राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय। - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में अब एक ऐसा मोड़ आया है, जिसकी चर्चा मामले की जांच शुरू होने के साथ ही होती रही थी। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव को पुलिस ने आरोपी नहीं, बल्कि गवाह बनाया है। 25 जून को राम जन्मभूमि थाने में दर्ज मुकदमे की विवेचना के बाद विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन की अदालत में दाखिल चार्जशीट में तीनों के नाम गवाहों की सूची में शामिल किए गए हैं।

विज्ञापन


चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस ने कुल 133 गवाह बनाए हैं। मुकदमे का ट्रायल शुरू होने के बाद इन गवाहों के बयान अदालत में दर्ज होंगे। चंपत राय समेत तीनों से ट्रस्ट की व्यवस्था, चढ़ावे की गणना और उससे संबंधित प्रक्रियाओं के बारे में पुलिस की ओर से साक्ष्य लिए जाने की संभावना है। हालांकि, गवाह बनाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने उनकी किसी भूमिका या जिम्मेदारी पर अंतिम निष्कर्ष दे दिया है।

ये भी पढ़ें - रायबरेली: मिशन 2027 के लिए पीडीए रथ पर सवार हुए अखिलेश, हजारों कार्यकर्ताओं ने किया स्वागत, तस्वीरों में देखें नजारे
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें - 78 करोड़ के गबन में ग्रीन रे इंटरनेशनल के तीन आरोपी गिरफ्तार, दोगुना वापसी का दावा कर निवेशकों को फंसाया


जिस पद पर रहते उठते रहे सवाल, अब उसी व्यवस्था पर देनी होगी गवाही
चंपत राय लंबे समय तक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव रहे। इसी दौरान मंदिर में चढ़ावे की गणना और उससे जुड़ी व्यवस्थाएं संचालित होती रहीं। चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट की आंतरिक व्यवस्था और जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठते रहे थे। पुलिस की पहली जांच में भी व्यवस्था संबंधी लापरवाही के पहलू सामने आने की बात कही गई थी। अब चार्जशीट में उन्हें आरोपी बनाने के बजाय पुलिस का गवाह बनाया गया है। ऐसे में मुकदमे की सुनवाई के दौरान उनसे उस व्यवस्था और घटनाक्रम से संबंधित सवाल किए जा सकते हैं, जिसकी जिम्मेदारी ट्रस्ट के स्तर पर तय थी।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें