अयोध्या। मानस राममंदिर विषय पर तीर्थ क्षेत्र पुरम में श्रीराम कथा का प्रवचन करते हुए राष्ट्रीय संत मोरारी बापू ने कहा कि लोग कहते हैं कि राम भारत के प्राण हैं, लेकिन मैं कहता हूं कि राम भारत के प्राण नहीं, प्राण के भी प्राण हैं। राम भारत के प्राण और विश्व की आत्मा हैं। राम हैं तो सूर्य है, राम हैं तो चंद्र है, राम हैं तो अग्नि है, राम हैं तो सृष्टि है, राम ही सत्य और सनातन हैं।
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की खुशी में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से रामकथा का आयोजन कराया जा रहा है। रामकथा का प्रवचन कर रहे मोरारी बापू ने दूसरे दिन की कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि राम भी महामंत्र और रामकथा भी महामंत्र है। भगवान शिव रामनाम को महामंत्र बताते हैं। रामचरित मानस केवल महाकाव्य नहीं, महामंत्र है। जिसको जगत में पूज्य होना है वह रामनाम का आश्रय ले।
हनुमान चाहिए तो राम को पकड़ो। शुद्ध रहना है तो राम को पकड़ो। पतित, वंचित, तिरस्कृत राम ने सबको सम्मान दिलाया। कलियुग में केवल एक ही नाम है वह है राम का नाम। भाव में जपो या अभाव में जपो, चाहे जैसे जपो...राम बेड़ा पार कर ही देते हैं। कहा कि स्पर्धा में नहीं लेकिन हम श्रद्धा में जरूर आगे हैं। श्रद्धा नहीं तो धर्मारंभ नहीं हो सकता। श्रद्धा से ही ज्ञान की उपलब्धि है। कथा अवसर पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि समेत अन्य मौजूद रहे।
ट्रस्ट को भेंट किए तीन ग्रंथ
मोरारी बापू अपने साथ तीन पवित्र धार्मिक ग्रंथ लेकर आए हैं। बापू ने राममंदिर ट्रस्ट पदाधिकारियों को वाल्मीकि रामायण, तुलसी रामायण और रामचरित मानस ग्रंथ भेंट किए। महासचिव चंपत राय ने कहा कि यह तीनों पवित्र ग्रंथ रामलला के गर्भगृह में स्थापित करेंगे। मंदिर आने वाले भक्त इन पवित्र ग्रंथों का दर्शन कर सकेंगे।