अयोध्या। आज अयोध्या में बड़ी धूम मची है, मेरे राम की शादी है...राम जी की अजब बरात अवध जी से मिथिला चली...जैसे गीत गूंज रहे थे। महिला व पुरुष उत्साह में नृत्य कर रहे थे, संतों की आंखें खुशी से डबडबा रहीं थीं। हर कोई जय श्रीराम का जयघोष कर रहा था। यह आनंदित करने वाला दृश्य मंगलवार की सुबह रामसेवकपुरम का था। अभिजीत मुहुर्त व प्रीति योग में ठीक 11:12 बजे बरात रामसेवकपुरम से निकली। बरात में 250 से अधिक बराती शामिल रहे।
इससे पहले रामसेवकपुरम में सुबह नौ बजे से ही बराती जुट गए थे। वैदिक आचार्यों ने बरात के पूर्व के सभी लोकाचार संपन्न कराए। इसके बाद श्रीसीताराम की मूर्ति का पूजन एवं आरती उतारी गई। इसके बाद धर्मरथ के आगे नारियल फोड़कर वशिष्ठ की भूमिका निभा रहे श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बरात को रवाना किया। बरात के आगे-आगे चंपत राय, बरात के संयोजक राजेंद्र सिंह पंकज, मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव, कारसेवकपुरम प्रभारी शिवदास, भाजपा नेता शक्ति सिंह, जिपं अध्यक्ष प्रतिनिधि रोहित सिंह, विहिप के शरद शर्मा, वीरेंद्र चल रहे थे।
उनके पीछे बरात में शामिल चारों रथ व 20 से अधिक वाहन थे। बरातियों का जत्था ढ़ोल-नगाड़े की थाप पर उत्साह में नृत्य करता चल रहा था।
इससे पहले रामसेवकपुरम में करीब दो घंटे तक बरातियों ने जश्न मनाया। बरात में शामिल विभिन्न प्रांतों से आए महिला-पुरुषों ने खूब नृत्य किया, जयकारे लगाए तो रामचरित मानस की पंक्ति गावहिं गीत मनोहर नाना। अति आनंदु न जाइ बखाना...चरितार्थ होती नजर आई। बरात जैसे रामसेवकपुरम से निकलकर सड़क पर पहुंची लोग एक झलक पाने को लालायित हो उठे। चढ़ी अटारिन्ह देखहिं नारीं। लिएं आरती मंगल थारीं...कुछ इसी तरह का दृश्य था। बरात पर जगह-जगह पुष्पवर्षा भी होती रही।
रथ में शामिल श्रीसीताराम की मूर्ति को कारसेवकपुरम में संचालित महायज्ञ का दर्शन व परिक्रमा कराई गई। इसके बाद परिक्रमा मणिरामदास की छावनी होते हुए रवाना हुई। अयोध्या से उपहार व महाकाल से आए एक लाख 11 हजार 111 लड्डू व रामलला का प्रसाद भी ले जाया गया। इस दौरान बरात की सुरक्षा के व्यापक इंतजाम थे।
बरात में 51 तीर्थों का जल भी शामिल
बरात में भारत और नेपाल के 51 तीर्थों की नदियों का जल भी शामिल है। इस जल को एक रथ पर सवार किया गया है। इसके अलावा दो रथों पर भगवान राम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुहन के स्वरूप भी विराजमान किए गए हैं। इन्हीं स्वरूपों के साथ जनकपुर में विवाह का लोकाचार संपन्न कराया जाएगा। तिरुपति के 40 वैदिक ब्राह्मण विवाह कराएंगे। बरात तीन दिसंबर को अयोध्या पहुंचेगी। छह दिसंबर को भव्य रामविवाह होगा। आठ दिसंबर को बरात वापस अयोध्या के लिए प्रस्थान करेगी। बरात का जगह-जगह अभिनंदन किया जाएगा। रास्ते में बरातियों की संख्या बढ़कर 500 से अधिक होने की संभावना है।
जनकपुर में विवाहोत्सव का कार्यक्रम
तीन दिसंबर - जनकपुर नगर भ्रमण
चार दिसंबर- तिलकोत्सव (समधी मिलन)
पांच दिसंबर- धनुषाधाम दर्शन, मटकोर
छह दिसंबर- रामडोला नगर भ्रमण, जानकी मंदिर में विवाहोत्सव
सात दिसंबर- 51 तीर्थों के जल से श्रीसीताराम महाभिषेक, रामकलेवा