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Ayodhya News: भारत-नेपाल के संबंधों में मिठास घोलेगी रामबरात

Wed, 27 Nov 2024 01:24 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
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रामबरात में चंडीगढ़ से बाराती
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अयोध्या। भारत और नेपाल के बीच प्राचीन मैत्री की जड़ों को मजबूत करने के लिए शुरू की गई विश्व हिंदू परिषद की मुहिम दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत कर रही है। इस बार अयोध्या से निकली भव्य रामबरात से भी यह अवधारणा पुष्ट होती नजर आई। बरात में शामिल बरातियों का मानना है कि अयोध्या से जनकपुर के लिए जा रही रामबरात न सिर्फ भारत-नेपाल के संबंधों में मिठास घोलेगी बल्कि राम के आदर्शों को अपनाने से ही पूरे विश्व में सनातन का डंका बजेगा, यह संदेश भी देगी।
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श्रीराम की संस्कृति विश्वव्यापी है। श्रीराम बरात में शामिल होने के लिए देश के कोने-कोने से बराती पहुंचे तो इसे बल भी मिला। विहिप का कहना है कि राम बरात में देश के 17 प्रांतों से बराती शामिल हुए हैं। दिल्ली, चंडीगढ़, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, बिहार, गुजरात से लेकर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से बराती श्रीरामबरात का हिस्सा बनकर अभिभूत नजर आए। चंडीगढ़ से आठ लोग बरात में शामिल होने के लिए आए हैं। मंजू चौहान, पिंकी चौहान व सुषमा राणा उत्साहित होकर नृत्य कर रहीं थी। कहा कि 15 दिन के लिए घर-बार छोड़कर राम की बरात में शामिल होने के लिए आए हैं। यह जीवन की धन्यता है, उत्साह इतना है कि कह नहीं सकते।
लखनऊ निवासी घनश्याम बरात का हिस्सा बनकर उत्साहित थे। कहा कि श्रीराम की बरात महज लोकाचार नहीं है, यह समाज को एक सूत्र में बांधने का उत्सव है। दिल्ली निवासी व्यापारी जयभगवान गर्ग भी बरात में अपने परिवार के साथ शामिल हैं और अत्यंत निहाल थे। कहा कि श्रीराम सनातन संस्कृति के मानबिंदु हैं। श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद हर उत्सव का उल्लास बढ़ गया है। कामकाज से 15 दिन की छुट्टी लेकर बराती बनने आया हूं। प्रयागराज से आए संत अरुण स्वरूप ब्रह्मचारी बोले श्रीसीताराम का विवाहोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है बल्कि सनातन संस्कृति का मंगलगान भी है।
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जन-जन तक पहुंचाएंगे राम के आदर्श
बरात के संयोजक राजेंद्र सिंह पंकज ने कहा राजनीति तोड़ती है और धर्म जोड़ता है। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह पहली रामबरात है। बरात उत्तर प्रदेश में दो दिन व छह दिन बिहार में रहेगी। तीन दिसंबर को नेपाल की सीमा में प्रवेश करेगी। विवाह की लीला के माध्यम से हम राम के आदर्श, चरित्र को जन-जन तक पहुंचाने का काम करेंगे। यह उत्सव भारत और नेपाल के संबंधों को मजबूत करेगा।

उत्सव के बहाने ताजा होती त्रेतायुग की याद

बरात में वशिष्ठ की भूमिका निभा रहे महंत डॉ़ रामअवतार दास ने कहा कि अयोध्या से जनकपुर की यह धार्मिक यात्रा भारत और नेपाल के संबंधों में मिठास घोलने का काम करेगी। सीता व राम अनादि हैं, इनका विवाह नौ लाख वर्ष पहले हुआ था। हम विवाहोत्सव मनाते हैं। उत्सव के बहाने त्रेतायुग की याद ताजा होती है।

नूर आलम भी रामबरात में हुए शामिल

राम की बरात में अयोध्या के नूर आलम भी शामिल हैं। नूर आलम ने बरात में शामिल रथों का निर्माण भी किया है। वे पिछले 15 दिनों से अपनी टीम के साथ रथों का निर्माण करने में जुटे रहे। कहा कि रामबरात में सहभागी बन रहे हैं, हमारा सौभाग्य है। हम भी बरात जा रहे हैं, राम सबके हैं, उन्होंने समरसता का संदेश दिया था।
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