अयोध्या। निर्मोही अखाड़ा का विवाद अब गहराता जा रहा है। मंगलवार को निर्मोही अखाड़ा अयोध्या में पंचों की बैठक हुई। बैठक में 11 पंच शामिल थे, जबकि दो ऑनलाइन जुड़े थे, सबने सर्वसम्मति से महंत दिनेंद्र दास का पक्ष लिया। बैठक के बाद राम मंदिर के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास ने उन्हें महंत पद से हटाने और मानसिक रूप से अस्वस्थ बताए जाने के दावों पर प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से उनके खिलाफ सुनियोजित तरीके से भ्रम फैलाया जा रहा है। महंत ने दावा किया कि इस मामले में उन्होंने पहले ही सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने कहा कि संबंधित बैठकों की कार्रवाई की प्रतियां भी न्यायालय में प्रस्तुत की गई हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 की जिस बैठक को कोरोना महामारी का हवाला देकर टालने की बात कही जा रही है, उसी अवधि में बैठकें आयोजित की गईं और उन बैठकों की कार्रवाई पर सभी के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं। दिनेंद्र दास ने जनवरी और फरवरी 2020 के अलावा 22 फरवरी 2024 तथा तीन मई 2025 की बैठकों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उन सभी बैठकों की कार्यवाही में उनके हस्ताक्षर हैं और उस समय उन्हें मानसिक रोगी नहीं बताया गया।