अयोध्या। चक मार्ग की नाप कराने के लिए दो हजार रुपये रिश्वत लेने के मामले में दोषी राजस्व निरीक्षक राम जियावन शर्मा को जेल से रिहा किए जाने का आदेश पारित किया गया है। यह आदेश विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन कोर्ट के न्यायाधीश रजत वर्मा ने उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में पारित किया है।
दोष सिद्ध अभियुक्त राम जियावन शर्मा ने विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन कोर्ट की ओर से 30 अप्रैल को सुनाई गई सजा के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील प्रस्तुत किया गया। उच्च न्यायालय इलाहाबाद खंडपीठ लखनऊ की ओर से दोषी राम जियावन शर्मा की अपील को स्वीकार करते हुए जमानत स्वीकार करने का आदेश पारित किया गया। उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में राम जियावन शर्मा ने जमानत धनराशि नियत किए जाने का प्रार्थना पत्र विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन कोर्ट में प्रस्तुत किया। न्यायाधीश ने प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में 25 हजार रुपये की जमानत धनराशि के बंधपत्र दाखिल किए जाने के बाद जेल से रिहा किए जाने का आदेश पारित किया।
घटना अंबेडकर नगर जिले के महरुआ थाना क्षेत्र की है। 5 जून 2014 को बरामदपुर गांव निवासी मनोज मिश्रा ने उप जिला अधिकारी भीटी को एक प्रार्थना पत्र दिया। प्रार्थना पत्र में मनोज मिश्रा ने अपनी दादी के नाम से गाटा संख्या 373 होने की बात कही। इसी भूमि के बगल के चक मार्ग को अतिक्रमण से मुक्त कराए कराए जाने के लिए पैमाइश की मांग की। उप जिलाधिकारी भीटी ने राजस्व निरीक्षक रहे राम जियावन शर्मा को पुलिस टीम के साथ चक मार्ग की नाप करने का आदेश जारी किया। चक मार्ग की नाप करने के लिए दो हजार रुपये रिश्वत मांगे जाने पर मनोज मिश्रा ने एंटी करप्शन को लिखित रूप से शिकायत दर्ज कराई। 25 जून 2014 को एंटी करप्शन की ट्रैप टीम ने रिश्वत की धनराशि के साथ राम जियावन शर्मा को गिरफ्तार किया था।