अयोध्या। भारत का समाज कभी भी राजसत्ता के अधीन नहीं रहा। जो समाज शत-प्रतिशत राजसत्ता पर निर्भर हो जाता है, उस समाज की मृत्यु निश्चित है। हम पराधीन रहे, लेकिन पराधीनता कभी स्वीकार नहीं की, लगातार लड़ते रहे। सरकार अपना काम करती है समाज का भी कुछ कर्तव्य होता है। ये बातें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहीं।
वह एकल अभियान संस्कार शिक्षा की ओर से दो दिवसीय राष्ट्रीय सत्संग प्रतियोगिता के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा की कथाएं आज महंगी हो गई हैं, धन संपन्न लोग ही कथा करा पा रहे हैं। इसलिए विहिप की जो कथाकार निर्मित करने की योजना है, इसी के चलते वनवासी क्षेत्र के समाज तक भी राम नाम का गुणगान कर पा रहे हैं। हमारा कार्य भारतवर्ष को संसार में वैभवशाली बनाने के लिए है। हम केवल भारत के सिटीजन ही नहीं हैं, इस धरती के पुत्र हैं। हमारे यहां पृथ्वी को माता माना गया है। मातृभूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्या...अर्थात भूमि मेरी माता है और मैं पृथ्वी का पुत्र हूं। उन्होंने मंदिर निर्माण की यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि राम मंदिर समाज के योगदान से बना है। इसलिए यहां किसी का नाम नहीं लिखा जाएगा।
राम मंदिर के ट्रस्टी डॉ़ अनिल मिश्र ने बताया कि इस प्रतियोगिता में देशभर के विभिन्न प्रांतों से 22 सत्संग मंडलियां भाग ले रही हैं। एक सत्संग मंडली में 10-15 सत्संगी शामिल होंगे। दो दिवसीय राष्ट्रीय सत्संग प्रतियोगिता में 22 मंडलियों के 231 सत्संगी प्रतिभागी होंगे जबकि 500 प्रतिनिधि देशभर से भाग लेने अयोध्या पहुंचे है। इसमें असम, बंगाल, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार,उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात,राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल,जम्मू, उत्तराखंड, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, आदि राज्यों समेत नेपाल राष्ट्र की सत्संग मंडलियांं शामिल हैं। कार्यक्रम का संचालन दिलेश्वर ने किया। इस दौरान नंद किशोर दास, महेश मित्तल, डॉ़ निर्मला पेरीवाल, मंजू केडिया, विजय केडिया, महानगर संघ चालक अयोध्या डॉ़ विक्रमा प्रसाद पांडेय, पूर्व प्राचार्य डॉ़ अभय कुमार सिंह, उमाशंकर मिश्र, लल्लन शर्मा, शिव प्रसाद शुक्ल सहित अन्य मौजूद रहे।
अभियान के सूत्रधार रहे कार्यकर्ताओं का हुआ सम्मान
- कार्यक्रम में कथाकार प्रशिक्षण केंद्र की योजना के सूत्रधार रहे, योजना को मूर्त रूप देने में अहम भूमिका निभाने वाले संतों व कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया। श्याम नारायण दुबे, महंत रामशंकर दास रामायणी, महंत रामऔतार दास, महंत कमलादास रामायणी, डॉ़ सुनीता शास्त्री सहित अन्य को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। डॉ़ सुनीता शास्त्री ने कहा कि कथाकार प्रशिक्षण केंद्र योजना से श्रीराम की कथा वनवासी क्षेत्रों तक भी पहुंची है। गांव-गांव, घर-घर कथाकार तैयार किए गए जो अब पूरे देश में श्रीरामकथा को प्रसारित कर रहे हैं।