अयोध्या। मेडिकल कॉलेज दर्शननगर के पूर्व प्राचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार के खिलाफ शासन ने शिकंजा कस दिया है। प्रारंभिक जांच में अनधिकृत अवकाश के दौरान चेकों पर हस्ताक्षर कर भुगतान कराने के आरोप प्रथमदृष्टया सही पाए गए हैं। मामले की विस्तृत जांच के लिए महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण (डीजीएमई) को जांच अधिकारी नामित किया गया है।
शासन के चिकित्सा शिक्षा अनुभाग-3 की ओर से 20 जुलाई को इस आशय का पत्र जारी हुआ है। पत्र के अनुसार डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार के खिलाफ शिकायत की गई थी कि उन्होंने अवकाश अवधि में जीईएम (जेम) अनुबंध जारी किए और भुगतान के लिए चेकों पर हस्ताक्षर किए। शासन के निर्देश पर डीजीएमई की ओर से कराई गई प्रारंभिक जांच में इसकी पुष्टि हुई है।
इसके आधार पर डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार के खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई संस्थित कर दी गई है। अपर मुख्य सचिव अमित मोहन घोष ने डीजीएमई को जांच अधिकारी नियुक्त करते हुए आरोपपत्र तैयार कर साक्ष्यों सहित एक सप्ताह के भीतर जांच आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इसका आरोपपत्र अलग से निर्गत करने की जानकारी दी गई है।
यह था मामला
पूर्व प्राचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने 21 सितंबर 2023 को मेडिकल कॉलेज में कार्यभार ग्रहण किया था। चार जनवरी को उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने भ्रष्टाचार के आरोप में हटा दिया। इसके बाद वह अवकाश पर चले गए। आरोप है कि छुट्टी पर होते हुए भी 7 और 10 जनवरी को करीब 84 लाख का जेम कॉन्ट्रैक्ट जारी किया। 8 से 10 जनवरी के बीच ही 17 चेकों के जरिये 1,28,90,990 रुपये के भुगतान करा दिए। आरोप है कि इस अवधि में उन्होंने 2.12 करोड़ से अधिक के सरकारी धन का व्यय किया।