सरयू जयंती की पूर्व संध्या पर समाजसेवी कौस्तुभ आचारी के नेतृत्व में मां सरयू की आरती करते लोग।
- पांच दिवसीय सरयू जयंती महोत्सव में दिखा श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक उल्लास का अद्भुत संगम
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संवाद न्यूज एजेंसी
अयोध्या। राम की पैड़ी स्थित सहस्त्रधारा घाट पर आयोजित पांच दिवसीय सरयू जयंती महोत्सव के चौथे दिन श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रीराम कथा के दौरान जगद्गुरु द्वाराचार्य एवं मलूकपीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्र देवाचार्य ने मां सरयू की महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि मां सरयू भगवान श्रीराम के दिव्य चरित्र की प्रत्यक्ष साक्षी हैं। उन्होंने कहा कि वशिष्ठ जी के नेत्रों से प्रकट हुई मां सरयू की महिमा का जितना गुणगान किया जाए, उतना कम है। आज भी जो श्रद्धालु पूर्ण आस्था और समर्पण भाव से मां सरयू की शरण में आता है, उसे उनकी कृपा और महिमा का साक्षात अनुभव होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से मां सरयू के प्रति श्रद्धा, सेवा और संरक्षण का भाव बनाए रखने का आह्वान भी किया।
आंजनेय सेवा संस्थान विकास समिति की ओर से आयोजित महोत्सव में समिति के अध्यक्ष महंत शशिकांत दास ने संत-महंतों का अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत व सम्मान किया। इससे पहले चौथे दिन के सत्र का उद्घाटन अर्जुनदेवाचार्य कृपालु रामभूषण दास ने किया। संध्या बेला में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने महोत्सव को भक्ति के रंग में सराबोर कर दिया। भजन, गीत-संगीत और भगवान श्रीराम के जन्म प्रसंग की संगीतमय प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। इस अवसर पर महंत गौरीशंकर दास, महंत जनार्दन दास, महंत मनीष दास, महंत राघवेश दास सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।
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10 से अधिक संस्थाएं आज मनाएंगी उत्सव
अयोध्या। सरयू जयंती का मुख्य पर्व ज्येष्ठ पूर्णिमा पर सोमवार को मनाया जाएगा। सरयू तट पर 10 से अधिक संस्थाओं की ओर से विभिन्न आयोजन किए जाएंगे। देर शाम मां सरयू की भव्य झांकी सजाई जाएगी। संस्थाओं की ओर से महाआरती का आयोजन होगा। इससे पहले सुबह के सत्र में मां सरयू का विभिन्न द्रव्यों से अभिषेक किया जाएगा। संस्थाओं ने महोत्सव की तैयारी पूरी कर ली है।