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लखनऊ: अमौसी की हवा दमघोंटू, चारबाग में शोर बेकाबू, बारिश के बाद भी राजधानी की हवा में धूल

Tue, 03 Nov 2026 10:07 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

आईआईटीआर की टीम ने सितंबर-अक्तूबर 2026 के दौरान आठ हफ्ते तक शहर के नौ स्थानों पर हवा की गुणवत्ता जांची। इनमें लखनऊ के अलीगंज, विकास नगर, इंदिरा नगर, गोमती नगर, चारबाग, आलमबाग, अमीनाबाद, चौक और अमौसी शामिल हैं।
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- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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राजधानी लखनऊ में इस बार अच्छी बारिश के बावजूद हवा की सेहत नहीं सुधर सकी। सड़क निर्माण, जगह-जगह खुदाई, बढ़ते वाहन और उड़ती धूल ने हवा में प्रदूषण फिर बढ़ा दिया है। भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईआईटीआर) की पोस्ट-मानसून-2026 रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल के मुकाबले इस बार हवा में पीएम-10 की मात्रा 26.2 प्रतिशत और पीएम-2.5 की मात्रा 8.2 प्रतिशत बढ़ गई है। बीते साल राजधानी मे पीएम-10 का औसत 114.8 था, जो इस साल बढ़ कर 147.5 हो गया है।

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सबसे चिंताजनक स्थिति औद्योगिक क्षेत्र अमौसी की है। यहां पीएम-10 का औसत स्तर 188.5 यानी मानक से 88 फीसदी ज्यादा मिला। वहीं पीएम-2.5 93.5 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज किया गया।

राजधानी के नौ इलाकों में आठ हफ्ते तक की गई जांच
आईआईटीआर की टीम ने सितंबर-अक्तूबर 2026 के दौरान आठ हफ्ते तक शहर के नौ स्थानों पर हवा की गुणवत्ता जांची। इनमें अलीगंज, विकास नगर, इंदिरा नगर, गोमती नगर, चारबाग, आलमबाग, अमीनाबाद, चौक और अमौसी शामिल हैं। इनमें चार आवासीय, चार व्यावसायिक और एक औद्योगिक क्षेत्र था। जांच में सामने आया कि प्रदूषण अब केवल औद्योगिक और व्यस्त बाजारों तक सीमित नहीं है। आवासीय इलाकों में भी पीएम-10 का औसत स्तर 116 और पीएम-2.5 का 61.7 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर मिला। दोनों ही राष्ट्रीय मानकों से अधिक हैं।
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इंदिरानगर और चारबाग की हवा सबसे खराब
आवासीय क्षेत्रों में इंदिरानगर सबसे ज्यादा प्रदूषित मिला, जबकि व्यावसायिक इलाकों में चारबाग की हवा सबसे खराब रही। यहां पीएम-10 का औसत स्तर 157.2 और पीएम-2.5 का 81.6 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज किया गया। रिपोर्ट में शहर में चल रहे निर्माण और विकास कार्यों को प्रदूषण बढ़ने की प्रमुख वजह बताया गया है। अंडरपास, सड़कें, फुटपाथ, केबल और पानी की पाइपलाइन के लिए हो रही खुदाई से धूल उड़ रही है। जाम के दौरान सड़क पर जमी धूल भी दोबारा हवा में घुल जा रही है।

एक साल में 4.9 प्रतिशत बढ़े वाहन
रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2026 तक लखनऊ में पंजीकृत वाहनों की संख्या 31.99 लाख पहुंच गई थी। एक साल में इसमें 4.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या 59.7 प्रतिशत बढ़ी, लेकिन पेट्रोल की खपत में भी 5.6 प्रतिशत का इजाफा हुआ।

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