04- राम मंदिर में प्रवेश करते गुयाना के उपराष्ट्रपति - ट्रस्ट
अयोध्या। दक्षिण अमेरिकी देश गुयाना के उपराष्ट्रपति डॉ. भरत जगदेव का अयोध्या दौरा केवल एक औपचारिक यात्रा भर नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से भारत और गुयाना के बीच सांस्कृतिक और कूटनीतिक रिश्तों को नई दिशा मिलने के संकेत दिखाई दिए।
डॉ. जगदेव ने अयोध्या पहुंचकर राम मंदिर में रामलला के दर्शन किए और मंदिर निर्माण कार्यों का अवलोकन किया। लगभग दो घंटे तक वे राम जन्मभूमि परिसर में रहे। गुयाना में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी है, जिनके पूर्वज 19वीं सदी में भारत से वहां गए थे। वहां आज भी रामायण पाठ, भजन-कीर्तन और भारतीय त्योहार सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में उपराष्ट्रपति का रामलला के दरबार में नतमस्तक होना केवल व्यक्तिगत आस्था नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों से सार्वजनिक जुड़ाव का प्रतीक माना जा रहा है।
इतिहासविद् डॉ. प्रज्ञा मिश्रा कहती हैं कि यह यात्रा भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ के विस्तार का भी संकेत है। अयोध्या आज वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में उभर रही है और विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी इसे अंतरराष्ट्रीय संवाद का मंच बना रही है। गुयाना जैसे कैरेबियाई-लैटिन अमेरिकी देश के शीर्ष नेतृत्व की उपस्थिति इस प्रभाव को और व्यापक बनाती है। ऊर्जा, कृषि और विकास सहयोग के क्षेत्रों में भारत और गुयाना के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। ऐसे समय में यह सांस्कृतिक जुड़ाव द्विपक्षीय विश्वास को और गहरा करने वाला कदम साबित होगा।
अयोध्या को मिल रही वैश्विक पहचान
राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या विश्व मानचित्र पर तेजी से उभरती आध्यात्मिक केंद्र बन रही है। विभिन्न देशों के राजनयिक और प्रतिनिधिमंडल यहां पहुंच रहे हैं। राम मंदिर के ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्र कहते हैं कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद भूटान व मॉरीशस के राष्ट्रपति रामलला के दरबार में हाजिरी लगा चुके हैं। गुयाना के उपराष्ट्रपति का आगमन इसी कड़ी में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। इस दौरे से यह संदेश है कि अयोध्या अब केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि वैश्विक सांस्कृतिक संवाद का भी प्रमुख मंच बन चुकी है।