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Ayodhya News: जैन मंदिर में महा मंडल अष्टचक्र विधान का शुभारंभ

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जैन मंदिर में अष्ट चक्र विधान के दौरान मौजूद रविद्रकीर्ति स्वामी व अन्य।
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अयोध्या। जैन समाज के प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल महा मंडल अष्टचक्र विधान का शुभारंभ बृहस्पतिवार को श्रद्धा, भक्ति और मंत्रोच्चार के बीच हुआ। पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने विधान में भाग लेकर भगवान की आराधना की। आठ दिनों तक चलने वाले इस विशेष धार्मिक आयोजन में प्रतिदिन पूजन-अर्चन के साथ कुल 2000 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे। अनुष्ठान का समापन श्रावण पूर्णिमा के दिन पूर्णाहुति के साथ होगा।
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विधान के शुभारंभ अवसर पर जैन मंदिर के पीठाधीश रविंद्रकीर्ति स्वामी ने महा मंडल अष्ट चक्र विधान की आध्यात्मिक महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि यह विधान आत्मशुद्धि, संयम, शांति और मोक्षमार्ग की साधना का प्रभावशाली माध्यम है। उन्होंने कहा कि श्रद्धा और विधि-विधान के साथ किया गया यह अनुष्ठान व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है तथा धर्म के प्रति आस्था को और अधिक दृढ़ बनाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे पूरे आठ दिनों तक चलने वाले इस विधान में सहभागी बनकर धर्म लाभ अर्जित करें। विधान का संपूर्ण अनुष्ठान प्रतिष्ठाचार्य विजय जैन के संयोजन में किया जा रहा है।

डॉ. जीवन प्रकाश जैन ने बताया कि महामंडल अष्ट चक्र विधान को श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान भी कहा जाता है। यह विधान सिद्ध परमेष्ठी, अष्ट कर्मों के नाश और पवित्र मंत्र-तंत्र-यंत्र की आराधना से जुड़ा है। ऐसा माना जाता है कि इस विधान की आराधना से ज्ञात-अज्ञात पाप नष्ट होते हैं और जीवन में शुद्धि आती है। इस अवसर पर आर्यिका चंदनामती, मनोज जैन, सुरेंद्र जैन, ऋषभ जैन, पारस जैन, आदेश जैन सहित विभिन्न प्रांतों से आए जैन श्रद्धालु मौजूद रहे।
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