राजारामचंद्राचार्य सेआशीर्वादलेते महंत दिनेंद्र दास।
अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के प्रकरण ने अब निर्मोही अखाड़े के शीर्ष संत को भी मुखर कर दिया है। 103 वर्षीय निर्मोही अखाड़े के वयोवृद्ध सरपंच महंत राजाराम चंद्राचार्य ने कहा कि यदि आज राम मंदिर की व्यवस्था की बागडोर निर्मोही अखाड़े के हाथ में होती तो चढ़ावे की चोरी जैसी स्थिति देखने को नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के लिए निर्मोही अखाड़ा वर्षों तक संघर्ष करता रहा, लेकिन मंदिर की व्यवस्था और अधिकार अखाड़े को नहीं मिल सके।
महंत राजाराम चंद्राचार्य ने राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की घटना पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि इस घटना से हिंदू समाज शर्मसार हुआ है। उनका कहना है कि जिस राम जन्मभूमि के लिए निर्मोही अखाड़े ने लंबे समय तक कानूनी और सामाजिक संघर्ष किया, वहां चढ़ावे की रकम में चोरी का आरोप सामने आना बेहद पीड़ादायक है। राम जन्मभूमि मामले में फैसला निर्मोही अखाड़े के पक्ष में नहीं आने के बाद से वह अयोध्या नहीं गए हैं। उनका कहना है कि यदि मंदिर की बागडोर निर्मोही अखाड़े के हाथ में होती तो चढ़ावे की व्यवस्था में इस तरह की अनियमितता की नौबत ही नहीं आती।
महंत राजाराम चंद्राचार्य के अस्वस्थ होने की जानकारी मिलने पर अयोध्या के निर्मोही अखाड़े के महंत और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास बुधवार देर शाम जयपुर पहुंचे और उनका कुशलक्षेम जाना। अयोध्या लौटने पर महंत दिनेंद्र दास ने उक्त जानकारी दी है।