अयोध्या। तिरुपति के लड्डू प्रसाद में गाय की चर्बी और मछली का तेल मिलने के बाद हनुमानगढ़ी अखाड़ा भी सजग हो गया है। हनुमानगढ़ी अखाड़ा एक दो दिन के भीतर प्रसाद के दुकानदारों के साथ बैठक करने की तैयारी में है। इस बैठक का मकसद दुकानदारों को प्रसाद की गुणवत्ता व शुद्धता को लेकर नसीहत देना है।
हनुमानगढ़ी अखाड़ा के शीर्ष महंत ज्ञानदास के उत्तराधिकारी महंत संजय दास ने बताया कि हनुमानगढ़ी में विराजमान हनुमंतलला को शुद्ध देशी घी के लड्डू अर्पित किए जाते हैं। यहां पहले से ही शुद्धता व गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जाता है। शुद्धता व गुणवत्ता पर हमें कोई संदेह नहीं है, फिर भी हनुमानगढ़ी के सभी दुकानदारों के साथ एक-दो में बैठक की जाएगी और उनसे गुणवत्ता व शुद्धता को लेकर चर्चा की जाएगी, ताकि प्रसाद की शुद्धता से कोई खिलवाड़ न हो। बताया कि दुकानदारों से जानकारी ली जाएगी कि वे प्रसाद जैसे लड्डू व पेड़ा बनाने के लिए किस कंपनी की कौन-कौन सी सामग्री प्रयोग करते हैं, ताकि उनकी शुद्धता का आकलन किया जा सके।
व्यापारी बोले- पहले से ही डालडा का प्रयोग बंद है
व्यापारी ज्ञानदीन ने बताया कि लड्डू बनाने के लिए वे केवल ज्ञान कंपनी के देशी घी का इस्तेमाल करते हैं। वह बजट में मिल जाता है। साथ ही सोना सिक्का, चना बेसन और चीनी मिलाकर लड्डू बनाया जाता है। व्यापारी विकास गुप्ता ने बताया कि करीब एक साल पहले ही हनुमानगढ़ी अखाड़ा ने डालडा से बनने वाले लड्डू पर रोक लगा दी थी। अब हनुमंतलला को केवल देशी घी में बने लड्डू ही अर्पित किए जाते हैं। अखाड़ा की ओर से समय-समय पर प्रसाद की जांच भी कराई जाती है।
अयोध्या के लड्डू और पेड़े को मिल चुका है जीआई टैग
हनुमानगढ़ी के लड्डू और खुरचन पेड़े को जीआई टैग भी मिल चुका है। हनुमानगढ़ी में इन मिठाइयों केा लगभग हर दुकान में पाया जाता है। अयोध्या हनुमानगढ़ी में प्रसाद के लिए मिलने वाले देसी घी में बने बेसन के लड्डू अपने सोंधेपन और बेजोड़ स्वाद के कारण श्रद्धालुओं में काफी लोकप्रिय हैं। खुरचन पेड़ा बनाने के लिए देशी घी को लंबे समय तक पकाया जाता है, ताकि हल्के भूरे रंग की एक मोटी परत बन जाए। इसके बाद विभिन्न तरीकों से इसमें मेवे, चीनी, इलायची आदि मिलाई जाती है।