फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रिश्तों के गुरु : मां और पिता ने गढ़ा जीवन का पाठ

Thu, 04 Sep 2025 11:43 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
विज्ञापन
प्रधानाचार्या कुसुमलता
विज्ञापन
राजकीय बालिका इंटर कॉलेज अयोध्या की प्रधानाचार्या कुसुमलता अगर आज जीजीआईसी की प्रधानाचार्या हैं, तो उनकी इस कामयाबी के पीछे उनकी मां गायत्री देवी का बड़ा योगदान है। वे बताती हैं, हम पांच भाई बहन हैं। आज सभी लोग जीवन में सफल हैं। मां के पिता के मृत्यु के कारण उनको बीच में पढ़ाई छोड़नी पड़ी, लेकिन उन्होंने हम सभी भाई-बहनों को पढ़ाया लिखाया। आज एक शिक्षिका हूं, और जब भी थकान या निराशा महसूस होती है, तो मुझे उनकी कही हुई बातें याद आती हैं। वे कहती थीं, बेटी, मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती, बस दिशा सही होनी चाहिए। यही सोच मेरे लिए प्रेरणा का स्रोत है।
विज्ञापन


पिता की सीख ने बदल दिया जीवन

मां हर किसी के जीवन में पहली गुरु होती है। विजय पाठक प्राथमिक विद्यालय देवकाली में हेड मास्टर के पद पर कार्यरत हैं। वे बताते हैं कि उनकी सफलता की जड़ें कहीं गहराई में छिपी हैं। पिता स्वर्गीय डॉ़ लल्लन प्रसाद पाठक की सीख से जीवन बदल गया। बताते हैं कि बचपन से ही पढ़ाई में ठीक था, लेकिन परीक्षा के समय हमेशा डर जाता था। उस समय पिता ही संभालते थे। वह कहते थे बेटा, डरने से कुछ नहीं होगा। परीक्षा अवश्य दो, तुम्हें सफलता जरूर मिलेगी। उनकी यह बातें विश्वास जगाती थीं। सच कहूं तो जिन भी परीक्षाओं में सफल हुआ, उसके पीछे पिता की यही प्रेरणा रही। जीवन के संघर्ष भरे दिनों में, जब आर्थिक तंगी थी और आगे की पढ़ाई कठिन लग रही थी, तब भी पिता ने ही हिम्मत दी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें