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Ayodhya News: स्वर्ण मंडित श्रीराम लला की मूर्ति का भव्य अनावरण

Mon, 29 Dec 2025 11:12 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
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अयोध्या। राम जन्मभूमि मंदिर सोमवार को एक और गौरवपूर्ण अध्याय का साक्षी बना। कर्नाटक से लाई गई सोने सहित अन्य रत्नों से जड़ित भगवान श्रीराम की भव्य प्रतिमा का राम मंदिर परिसर के तीर्थ यात्री सुविधा केंद्र में अनावरण किया गया। इस प्रतिमा का अनावरण श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय व ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास ने किया।
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तंजावुर कला शैली में बनी यह प्रतिमा अपनी बारीक कारीगरी, स्वर्ण आभा और रत्नों की चमक के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र बन गई है। प्रतिमा दान करने वाले मूर्तिकार डॉ. फणीश, पत्नी जयश्री और 100 श्रद्धालुओं के साथ अयोध्या पहुंचे। उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से मुलाकात की और श्रद्धापूर्वक प्रतिमा को स्थापित करवाया। जयश्री फणीश ने इस मूर्ति का निर्माण किया है। मूर्ति निर्माण में करीब नौ माह का समय लगा।
यह कोई साधारण मूर्ति नहीं है। इसे तंजावुर कला शैली में बनाया गया है। इसमें सोने के काम के साथ कीमती रत्न जड़े हैं। मूर्ति की ऊंचाई 10 फीट और चौड़ाई सात फीट है। इसका वजन करीब 600 किलोग्राम है। 17 दिसंबर को बेंगलुरु से मूर्ति रवाना की गई। 1900 किलोमीटर लंबे सफर में ट्रक कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश होते हुए उत्तर प्रदेश पहुंचा। 22 दिसंबर को यह मूर्ति सुरक्षित अयोध्या पहुंची। मूर्तिकार ने बताया कि प्लाई बोर्ड के ऊपर थर्माकोल और क्ले का उपयोग कर यह टू डी चित्र बनाया गया। सोना, वज्र के पत्थर आदि धातुओं से युक्त मूर्ति का मूल्य भेंटकर्ता ने 2़ 5 करोड़ बताया है।
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मूर्ति में दशावतार के भी हो रहे दर्शन
रामलला की मूर्ति की खासियत यह है कि इसमें रामलला के साथ दशावतार, गरुड़, ब्रह्मा, शिव, आंजनेय, नंदी, नवग्रह, शंख, चक्र, स्वास्तिक आदि भी खूबसूरती से उकेरे गए हैं। मूर्ति के चेहरे की भाव-भंगिमा से लेकर वस्त्रों और आभूषणों तक, हर पहलू में अद्भुत कलात्मक कौशल दिखाई देता है। राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से मिली जानकारी के अनुसार भारतीय डाक विभाग ने इस मूर्ति को अयोध्या पहुंचाने का जिम्मा उठाया था और बखूबी पहुंचाया भी। कर्नाटक से इतने भारी सामान को लाना आसान नहीं था, इसलिए इसे लकड़ी के एक खास बॉक्स में पैक किया गया और ट्रक पर चढ़ाने के लिए क्रेन का इस्तेमाल करना पड़ा।
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