अंबेडकरनगर। रमजान के दूसरे अशरे के 16वें रोजे पर शुक्रवार को जिले भर में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अकीदत के साथ जुमे की नमाज अदा की। सुबह से ही लोग जुमे की नमाज की तैयारी में जुट गए थे। रोजेदार दोपहर के समय मस्जिदों की ओर रवाना हुए।
शहर से लेकर टांडा, किछौछा व जलालपुर क्षेत्र की विभिन्न मस्जिदों में नमाज अदा करने के लिए लोगों की भीड़ रही। नमाज से पहले मस्जिदों के इमामों ने खुत्बा दिया। इसमें रमजान के महीने की अहमियत और उसकी फजीलत के बारे में बताया गया। साथ ही रोजा, नमाज, कुरआन की तिलावत और जरूरतमंदों की मदद करने की नसीहत दी गई। जुमे की नमाज के बाद लोग अपने-अपने कामों में लग गए। वहीं कई रोजेदार मस्जिदों में ही रुककर कुरआन की तिलावत और इबादत करते रहे। रमजान के महीने में मस्जिदों में इबादत करने वालों की संख्या बढ़ी हुई दिखाई दे रही है। अजान के साथ रोजेदारों ने खजूर और पानी से रोजा खोला। इसके बाद परिवार और परिचितों के साथ इफ्तार किया गया। इफ्तार के कुछ समय बाद लोग फिर से मस्जिदों की ओर रवाना हुए। वहीं बृहस्पतिवार को को दरगाह स्थित ताहिरा मस्जिद और बेलाल मस्जिद में मुकम्मल तरावीह खत्म होने के मौके पर कार्यक्रम हुआ। इस अवसर पर सैय्यदा चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष सैयद नूरुद्दीन अशरफ ने इमाम साहब को गुलाब के फूलों की माला पहनाकर सम्मानित किया।
लोगों की मदद करना बेहद सवाब का काम
इस मुबारक महीने में अपने पड़ोसियों, रिश्तेदारों और जरूरतमंद लोगों की मदद करना बेहद सवाब का काम है। रोजेदारों को चाहिए कि वे जकात, सदका और फितरा के जरिए गरीबों की सहायता करें, ताकि वे भी रमजान की खुशियों में शामिल हो सकें।
- सैयद नूरुद्दीन अशरफ
नफ्स पर काबू रखना सिखाता है रोजा
रोजा सिर्फ रूहानी सुकून का जरिया ही नहीं है। बल्कि जिस्मानी एहतियात और सेहत के लिहाज से भी अहमियत रखता है। रोजा इंसान को अपने नफ्स पर काबू रखना सिखाता है और आत्म-अनुशासन का संदेश देता है।
- सैयद निजाम अशरफ (धर्म गुरु)