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Ayodhya News: सरयू आरती के पुजारियों के लिए लागू हुआ ड्रेसकोड

Fri, 17 Apr 2026 10:49 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
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नितिन मिश्र
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अयोध्या। रामनगरी की शाम अब और भी मनोहारी होने जा रही है। प्रभु श्रीराम की नगरी की पहचान बन चुकी मां सरयू की संध्या आरती अब रंग, अनुशासन और आध्यात्मिक सौंदर्य के नए स्वरूप में दिखाई देगी। आरती की परंपरा को अधिक सुसंगठित और भव्य बनाने के लिए यहां पुजारियों के लिए ड्रेस कोड लागू किया गया है। अब सप्ताह के प्रत्येक दिन पुजारी निर्धारित रंगों के वस्त्र धारण कर आरती संपन्न करेंगे, जिससे श्रद्धालुओं को भक्ति के साथ सौंदर्य का भी अद्भुत अनुभव होगा।

संध्या होते ही जब सरयू तट पर दीपों की पंक्तियां जगमगाती हैं, घंटों और शंखनाद की ध्वनि गूंजती है, तब वहां उपस्थित हर मन श्रद्धा से भर उठता है। अब इस दिव्य दृश्य में एकरूप रंगों की छटा भी जुड़ जाएगी। सात बेदियों पर विराजमान पुजारी एक समान वेशभूषा में मां सरयू की आराधना करेंगे, तो आरती का स्वरूप और भी आकर्षक, अनुशासित और अलौकिक प्रतीत होगा। वहीं, दूसरी तरफ आरती घाट की भी भव्यता बढ़ गई है। प्रशासन की ओर से आरती घाट का सुंदरीकरण कराया गया है। संगमरमर के पत्थरों से सजी नौ वेदियां न सिर्फ सरयू के घाटों की बल्कि सरयू आरती की सुंदरता में इजाफा करती हैं। इसके अलावा यहां लाल पत्थरों से छतरीनुमा आकृति बनाई गई है। सेल्फी पॉइंट भी बनकर तैयार है। घाटों पर रामायण के विभिन्न प्रसंगों की झांकी आकर्षण बढ़ाती है।
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सातों दिन के लिए रंग निर्धारित
- अब तक पुजारी अपनी सुविधा अनुसार वस्त्र धारण करते थे, किंतु नई व्यवस्था के तहत सप्ताह के सातों दिन के लिए रंग निर्धारित किए गए हैं। सोमवार और शुक्रवार को श्वेत वस्त्र पवित्रता और शांति का संदेश देंगे। मंगलवार को भगवा और रविवार को लाल रंग का वस्त्र शक्ति और ऊर्जा की आभा बिखेरेगा। बुधवार को हरा रंग और बृहस्पतिवार को पीतांबर यानी पीला वस्त्र ज्ञान, मंगल और समृद्धि का प्रतीक बनकर आरती को नई छवि देगा। शनिवार को पुजारी नीले रंग का वस्त्र धारण करेंगे।
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वर्जन
आंजनेय सेवा संस्थान की ओर से करीब 10 वर्षों से आरती की परंपरा निभाई जा रही है। नित नया स्वरूप और भव्यता प्रदान करने की कोशिश रहती है। मठ-मंदिरों में जिस प्रकार दिनाें के अनुसार विग्रहों के वस्त्रों का रंग बदला जाता है, उसी परंपरा को अब सरयू आरती में भी स्थान दिया गया है। पुजारी सात दिन अलग-अलग ड्रेस में आरती करेंगे। यह केवल वेश परिवर्तन नहीं, बल्कि परंपरा और व्यवस्था का सुंदर संगम है।श्रद्धालुओं के लिए यह दृश्य निश्चित ही स्मृतियों में बस जाने वाला अनुभव होगा।
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