23- डॉ. मंगला वर्मा
अयोध्या। कभी-कभी समाज में ऐसे लोग सामने आते हैं, जिनका जीवन खुद एक संदेश बन जाता है। अश्वनी पुरम की निवासी डॉ. मंगला वर्मा ऐसी ही एक शख्सियत हैं, जिन्होंने बीते 13 वर्षों में समाजसेवा को केवल एक कार्य नहीं, बल्कि अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया है। पर्यावरण संरक्षण से लेकर शिक्षा, जरूरतमंदों की सहायता और नारी सशक्तिकरण तक उनका योगदान समाज के हर उस वर्ग को छूता है, जिसे सहारे और संवेदना की आवश्यकता है।
हरियाली के प्रति उनका प्रेम उनके आंगन से ही झलकता है। विभिन्न प्रजातियों के पौधों से सजा उनका बगीचा न केवल सौंदर्य का प्रतीक है, बल्कि पर्यावरण के प्रति उनकी सोच का आईना भी है। अब तक 2000 से अधिक पौधों का रोपण कर चुकीं डॉ. मंगला वर्मा लोगों को अधिक से अधिक पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करती हैं। वह विद्यालयों में पर्यावरण से जुड़ी प्रतियोगिताएं आयोजित कर बच्चों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का भाव भरती हैं, ताकि आने वाली पीढ़ी पर्यावरण संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी समझे।
मलिन बस्तियों में रहने वाले ऐसे बच्चे, जो पढ़ने की ललक रखते हैं लेकिन आर्थिक तंगी के कारण स्कूल से दूर रह जाते हैं, उनके लिए डॉ. मंगला वर्मा उम्मीद की किरण बनकर सामने आई हैं। हर वर्ष वह पांच से 10 बच्चों को गोद लेकर उनकी इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई का पूरा खर्च स्वयं उठाती हैं। बीते 13 वर्षों में वह 120 से अधिक बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ चुकी हैं। इसके अलावा चार से पांच बच्चों को हर वर्ष आईटीआई जैसी तकनीकी शिक्षा दिलवाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का भी कार्य कर रही हैं। वह हर साल लगभग 5000 जरूरतमंदों को कंबल वितरित करती हैं। वृद्ध आश्रम और कुष्ठ आश्रम में नियमित सेवा कार्य करना उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है। विद्यालयों में पठन-पाठन सामग्री बांटकर वे उन बच्चों की भी मदद करती हैं। वह जरूरतमंद परिवारों की बेटियों के विवाह में आर्थिक सहायता और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराकर परिवारों को संबल प्रदान करती हैं।