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Ayodhya News: भाजपा और सपा के बीच सीधी लड़ाई, मुद्दे नदारद

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अयोध्या। मिल्कीपुर में करीब एक महीने तक चले चुनाव प्रचार के बाद मतदान की तारीख अब आ गई है। अयोध्या की प्रतिष्ठापरक सीट पर होने जा रहे उपचुनाव में भाजपा और सपा के बीच सीधी लड़ाई है। चुनावी परिदृश्य में लंबे समय तक चली सरगर्मी के बाद भी मुद्दे नदारद हैं। यहां के रण में जातीय समीकरण ही सियासत की भावी तस्वीर तय करेंगे। सपा सांसद के आंसू फिजा बदलेंगे या फिर सीएम योगी आदित्यनाथ का राष्ट्रवाद कमाल करेगा, इस सवाल का जवाब आठ फरवरी को मिल जाएगा।
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दिल्ली विधानसभा के आम चुनाव के साथ यूपी की सिर्फ एक ही सीट पर उपचुनाव होने जा रहा है। बाकी नौ सीटों पर पहले ही उपचुनाव हो चुका है और उसके नतीजे भी सामने आ चुके हैं। अदालत में मामला विचाराधीन होने के चलते प्रदेश की अन्य सीटों के साथ यहां पर उपचुनाव नहीं हो सके थे। यह सिर्फ एक विधानसभा सीट का उपचुनाव नहीं है। कई मायनों में यह बेहद खास है। शायद इसीलिए प्रदेश ही नहीं देश भर के राजनीतिक पंडितों की नजर इस पर टिकी हुई है।

इसके पीछे एक खास वजह ये भी है कि भव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद भी लोकसभा चुनाव में भाजपा को सपा के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा था। तब इसकी चर्चा काफी दिनों तक देश-दुनिया में होती रही। मिल्कीपुर के ही विधायक रहे अवधेश प्रसाद ने फैजाबाद संसदीय सीट के चुनाव में भाजपा के लल्लू सिंह को पराजित किया था। अवधेश के सांसद बनने के बाद विधानसभा से उनके इस्तीफा देने पर ही यहां उपचुनाव हो रहा है।
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मंगलवार को मतदान के ठीक पहले मिल्कीपुर के राजनीतिक परिदृश्य की बात करें तो भाजपा और सपा दोनों के ही चुनाव अभियान के बाद भी वोटरों में खामोशी है। कुल मिलाकर जातीय समीकरण साधने की गुणा-गणित ही यहां के जनादेश का मार्ग प्रशस्त करेगी। खुद मुख्यमंत्री योगी की ओर से इस सीट के चुनाव अभियान की कमान अपने हाथ में लेने से भाजपा सरकार के सात मंत्रियों, 40 विधायकों और अन्य नेताओं की भी अग्नि परीक्षा होने जा रही है।

उधर, सपा ने चुनाव अभियान को तो बहुत धार नहीं दी लेकिन उसके नेता अपने गढ़ को बचाने की सभी रणनीति पर अमल करते नजर आए। मुख्य मकसद अपने कोर वोटरों को साधने के साथ भाजपा के समर्थक मतदाताओं में सेंध लगाना रहा। इसके लिए कई जातियों के क्षत्रपों को उतारा। पार्टी के शीर्ष स्टार प्रचारक अध्यक्ष अखिलेश यादव व सांसद डिंपल यादव ने यहां आकर चुनाव प्रचार भी किया। प्रचार के अंतिम दौर में एक एससी बेटी की हत्या के मसले पर कैमरे के सामने आंसू बहाकर सपा प्रत्याशी के सांसद पिता ने सहानुभूति बटोरने की भी कोशिश की।

यह अलग बात है कि उपचुनाव के दौर में मिल्कीपुर के सात दौरे कर चुके सीएम योगी ने शुरू से ही चुनाव का एजेंडा सेट कर दिया। उन्होंने सपा के परिवारवाद को निशाने पर रखा और भाजपा के राष्ट्रवाद को सामने रखा। सपा नेताओं की ओर से सामाजिक न्याय के महापुरुषों को अपमानित करने के तथ्यों को सामने रखकर बहुसंख्यक दलित आबादी को भी साधने का प्रयास किया।
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