अयोध्या। जिले में इस बार डेंगू की रफ्तार धीमी है। अभी लेकिन खतरा टला नहीं है। अस्पतालों में डेंगू व इससे मिलते-जुलते लक्षण वाले मरीजों का तांता है। विशेषज्ञों ने मच्छरजनित रोगों के प्रति सतर्क रहने की अपील की है।
जिले में करीब दो माह से डेंगू का प्रकोप शुरू हुआ है। फिर भी पिछले साल की अपेक्षा राहत है। गतवर्ष 10 अक्तूबर तक जिले में पीड़ितों की संख्या 319 थी और अंत तक यह 694 पहुंच गई थी। जबकि, इस बार यह संख्या 84 पहुंची है। इनमें शहर के 32 और ग्रामीण इलाकों के 52 मरीज हैं। आंकड़ों से डेंगू को लेकर राहत जरूर है, लेकिन अस्पतालों की ओपीडी से वार्डों तक बुखार, बदन दर्द, जोड़ों में दर्द, प्लेटलेट कम होने जैसे मरीजों की भरमार है।
मेडिकल कॉलेज दर्शननगर के मेडिसिन विभाग सोमवार को 01:30 बजे तक 354 मरीज देखे गए। इनमें लगभग 125 मरीज इन्हीं समस्याओं से पीड़ित रहे। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वीरेंद्र वर्मा ने बताया कि तीन-चार रोगियों में डेंगू की पुष्टि हुई, लेकिन कई मरीजों की डेंगू रिपोर्ट निगेटिव होने पर भी इससे मिलते-जुलते लक्षण थे।
तीन चरणों में होता है डेंगू
डॉ. वीरेंद्र वर्मा ने बताया कि डेंगू का पहला चरण है फेब्राइल। इसमें मरीजों में बुखार, बदन दर्द, जोड़ों में दर्द, सिर दर्द व शरीर में लाल चकत्ते बनते हैं। दो-तीन दिन के बाद बुखार उतरने लगता है, लेकिन यह स्थिति और गंभीर है। इसी के बाद क्रिटिकल फेज शुरू होता है। इसमें मरीजों में उल्टी, चक्कर, आंतरिक अंगों से रक्तस्राव, पेट में तेज दर्द आदि होता है। इसमें कई बार अंग फेल हो सकते हैं। इसके बाद रिकवरी फेज शुरू होता है।
एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि इस बार डेंगू का प्रकोप अपेक्षाकृत है। साथ ही रिकवरी भी तेजी से हो रही है। सीएमओ कार्यालय में बने कंट्रोल रूम से डेंगू पीड़ितों की निगरानी की जा रही है। आमजन से अपील है कि इसे लेकर भयभीत न हों, बल्कि लक्षण दिखते ही तुंरत इलाज कराएं।