अयोध्या। रामनवमी मेला के मुख्य पर्व आराध्य के जन्मोत्सव और सूर्य तिलक के दौरान अयोध्या में किए गए प्रशासनिक इंतजामों और सुरक्षा व्यवस्था पर खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी नजर रखे रहे। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से राम मंदिर और हनुमानगढ़ी में श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन और भीड़ नियंत्रण की पल-पल की अपडेट कमिश्नर गौरव दयाल और आईजी प्रवीण कुमार से ली जाती रही।
इतना ही नहीं सीएम योगी खुद भी रामलला के सूर्य तिलक का लाइव प्रसारण के माध्यम से साक्षी बने। इसके बाद उन्होंने एक्स पर लिखा भी ''सूर्यकुलभूषण प्रभु श्रीरामलला के भव्य भाल पर अंकित यह स्वर्णिम सूर्य तिलक सनातन राष्ट्र के ह्रदय में आस्था का अमर दीप प्रज्जवलित कर रहा है। समूचे भारत को आत्म गौरव के उजास से आलोकित करता यह सूर्य तिलक हमारी संस्कृति की दिव्यता और परंपराओं की पवित्रता की विराट अभिव्यक्ति है। यह सूर्य तिलक विकसित भारत-आत्म निर्भर भारत के प्रत्येक संकल्प को अपनी दिव्य आभा से दीप्त करेगा।''
सीएम योगी की ही परिकल्पना पर तय किए गए दो कार्यक्रम
वैसे भी रामनवमी मेला की तैयारियों को लेकर सीएम योगी ने यहां पर वरिष्ठ अफसरों के साथ बैठक कर पहले ही दिशा-निर्देश दे दिए थे। उन्ही के निर्देशों के अनुरूप प्रशासन और संबंधित विभागों ने रामनवमी पर अयोध्या आने वाले भक्तों को हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सभी इंतजाम किए थे। इतना ही नहीं सीएम योगी की परिकल्पना के आधार पर ही पर्यटन विभाग और संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय श्रीराम जन्मोत्सव में सरयू तट और राम की पैड़ी पर ढाई लाख दीपों को प्रज्जवलित करने के साथ राम मंदिर के मुख्य द्वार पर दर्शन के लिए आ रहे भक्तों पर सरयू जल की फुहारों के छिड़काव की कार्ययोजना को अंतिम समय में फाइनल किया गया।
आईजी प्रवीण कुमार ने बताया कि रामनवमी के मौके पर अयोध्या को जोन व सेक्टर में विभाजित कर सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद किया गया था। भारी वाहनों को पूर्वांचल एक्सप्रेस वे से डायवर्ट किया गया। श्रद्धालुओं को आवागमन में कहीं पर भी कोई असुविधा नहीं होने देने का प्रयास किया गया। सुरक्षा के लिए पैरामिलिट्री फोर्स के साथ पीएसी और सिविल पुलिस तैनात रही। सरयू नदी के आसपास जल पुलिस, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ ने निगरानी की। सुबह 9:00 से दोपहर 12:00 बजे तक पीक टाइम में राम मंदिर के सभी विशेष पास निरस्त कर दिए गए थे। आम श्रद्धालुओं को राम मंदिर में दर्शन के लिए प्राथमिकता दी गई।