अयोध्या। बाल कल्याण समिति की ओर से अभिभावकों को बच्चे सौंपने की प्रक्रिया सोमवार से शुरू की जा सकती है। इसके लिए अभिभावकों के पास जरूरी प्रमाण और शपथपत्र होना अनिवार्य है। इसके बाद ही वे अपने बच्चों को साथ ले जा सकेंगे। रविवार को अभिभावक लखनऊ पहुंचने लगे और शपथपत्र बनवाने की मशक्कत शुरू कर दी है। हालांकि इस गंभीर प्रकरण में अबतक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकी है।
मालूम हो कि बिहार के अररिया जिले से सहारनपुर जा रही बस को सीडब्लूसी, मानव तस्करी यूनिट और पुलिस ने देवकाली बाइपास से पकड़ा था। बस में 95 बच्चे और पांच मौलवी सवार थे। पुलिस ने मौलवियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की थी। वहीं बच्चों को सीडब्लूसी के अधिकारियों ने लखनऊ के बालगृह भिजवा दिया था। राज्य बाल संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ. शुचिता चतुर्वेदी से मुलाकात में बच्चों ने बताया था कि उनमें से कई दूसरी बार सहारनपुर मदरसे में भेजे जा रहे हैं। वहां की स्थितियों पर भी बच्चों ने खुलकर बातचीत की थी और अररिया के ही शबे नूर पर जबरन भेजने का आरोप लगाया था। दूसरी ओर मौलवियाें ने बच्चों को मदरसा ले जाने की बात कबूल की थी, लेकिन इससे जुड़े कोई भी कागज वे नहीं दिखा सके थे। इसके चलते पांचों मौलवी अभी तक पुलिस की हिरासत में हैं। सीडब्लूसी के अध्यक्ष सर्वेश अवस्थी ने बताया कि अभिभावकों से अबतक मुलाकात नहीं हुई है। सभी कागजों के साथ ही उनसे पूछताछ की जाएगी। इसके बाद ही बच्चे सौंपे जाएंगे। इसके अलावा अनाथ बच्चों की सुपुर्दगी के लिए सोशल इंवेस्टिगेशन किया जाएगा। इसके बाद ही उन्हें किसी रिश्तेदार को दिया जाएगा। एफआईआर को लेकर उन्होंने बताया कि पुलिस की ओर से अबतक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है।
सीडब्लूसी की ओर से एफआईआर का इंतजार कर रही पुलिस
एसपी ग्रामीण अतुल सोनकर के अनुसार मौलवियों से पूछताछ की जा रही है और तेजी से जांच भी हो रही है। लेकिन सीडब्लूसी की ओर से एफआईआर नहीं कराई गई है। इसके लिए इंतजार किया जा रहा है। सीडब्लूसी जो कदम उठाएगा उसी के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।