अयोध्या। शिक्षा के अधिकार आरटीई के तहत एडमिशन में आनाकानी करना स्कूलों पर भारी पड़ सकता है। इसका उदाहरण जिंगल बेल एकेडमी है। यहां कई अभिभावकों ने शिकायत की थी कि पिछले साल स्कूल में उनके बच्चों का आरटीई के तहत एडमिशन कराया गया था। लेकिन इस साल स्कूल प्रबंधन की ओर से ये कहकर बच्चों को निकाला जा रहा है कि कक्षा पांच तक हिंदी मीडियम की मान्यता सरेंडर कर दी गई है। हालांकि इस मामले में बीएसए ने स्कूल और अभिभावकों के बीच सामंजस्य बिठाने का प्रयास किया था, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। इसके बाद अभिभावकों ने इसकी शिकायत डीएम और मंडलायुक्त से भी की थी।
अब डीआईओएस की ओर से विद्यालय को पत्र जारी कर 13 अलग-अलग बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है। इसमें स्कूल से पिछले पांच वर्षों में आरटीई के तहत किए गए एडमिशन का पूरा विवरण, शुल्क के अलावा आय के अतिरिक्त स्त्रोत, संस्था में शुल्क वृद्धि प्रस्ताव के अनुमोदन की प्रमाणित प्रति समेत कई सवाल किए गए हैं। डीआईओएस राजेश कुमार आर्या ने बताया कि आरटीई के प्रवेश में स्कूलों की लापरवाही नहीं चलेगी। चयन होने के बाद यदि कोई स्कूल बच्चे का एडमिशन करने में आनाकानी करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
दो चरणों में 556 बच्चों को मिला आरटीई के तहत एडमिशन
आरटीई की एडमिशन प्रक्रिया में इस बार बदलाव किया गया था। चार चरणों में इसके प्रवेश प्रक्रिया इसी साल शुरू हुई है। पहले चरण में जिले के 378 और दूसरे में 178 बच्चों का एडमिशन किया गया है। साथ ही तीसरे चरण की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। लॉटरी के माध्यम से जल्द ही तीसरे चरण के एडमिशन भी शुरू कर दिए जाएंगे।