अयोध्या। बोगस (फर्जी) फर्म बनाकर एक साल में लगभग छह करोड़ रुपये का कारोबार हो गया। संदेह होने पर स्टेट जीएसटी की टीम ने छापेमारी की तो न दुकान का पता चला ना ही दुकान स्वामी का। इस दौरान अन्य प्रदेशों में भी कबाड़ की सप्लाई की गई और विभाग को लाखों का चूना लगा। अब विभाग फर्म संचालक की कुंडली खंगाल रहा है।
24 अगस्त 2023 को सेंट्रल जीएसटी से हैदरगढ़ में वर्मा इंटर प्राइजेज नामक एक फर्म का पंजीकरण हुआ था। अल्हदादपुर निवासी राम प्रसाद नामक एक व्यक्ति से किराये पर दुकान लेकर प्रतिष्ठान चलाने के दस्तावेज पंजीयन के समय लगे थे। तीन हजार रुपये प्रतिमाह की किरायेदारी दिखाकर दो गवाहों के हस्ताक्षर भी कराए गए थे। फर्म से कबाड़ खरीदने-बेंचने के लिए श्रावस्ती निवासी जितेंद्र कुमार वर्मा नामक व्यक्ति ने जीएसटी पंजीकरण कराया था।
पंजीयन के बाद से इस फर्म ने सालभर में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के अलावा उत्तराखंड, हरियाणा व अन्य प्रदेशों में लगभग 6.63 करोड़ रुपये का कारोबार किया। लेकिन विभाग को टैक्स नहीं जमा किया जा रहा था। ऐसे में विभागीय अधिकारियों की नजर इस फर्म पर पड़ी तो बीते माह उपायुक्त कर श्रीप्रकाश यादव की टीम प्रतिष्ठान पर छापेमारी के लिए पहुंची, लेकिन इस नाम से कोई प्रतिष्ठान नहीं मिला। किरायेदार का भी पता नहीं चला। पंजीयन के समय दिया गया मोबाइल फोन नंबर भी बंद मिला। उपायुक्त ने बताया कि पंजीयन के समय लगे आधार कार्ड के आधार पर प्रतिष्ठान मालिक को खोजने का प्रयास किया जा रहा है। अपर आयुक्त ग्रेड-टू आरएस विद्यार्थी ने बताया कि इस तरह से फर्जीवाड़ा करने वालों पर नजर रखी जा रही है। गड़बड़ी करते मिलने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ विधिक कार्रवाई भी कराई जाएगी।