अयोध्या। गांव में एक शादी कार्यक्रम में लाइट का काम करने आए युवक शीतल की ओर से आधी रात में 16 साल की दलित किशोरी को ले जाकर दुष्कर्म करने के मामले में अदालत ने आरोपी को कोई राहत देने से इंकार कर दिया। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रथम निरुपमा विक्रम ने अपराध की गंभीरता व जमानत का कोई पर्याप्त आधार न पाते हुए शुक्रवार को यह आदेश पारित किया है।
विशेष लोक अभियोजक विनोद कुमार उपाध्याय के अनुसार घटना थाना कोतवाली अयोध्या क्षेत्र के एक गांव की है। 14 मई को किशोरी के पड़ोस में बहू भोज था उसी में शीतल लाइट का काम करने आया था। रात के दो बजे जब दलित किशोरी पानी पीने के लिए बाहर नल पर आई तभी उसका मुंह दबाकर कर उसे मोहबरा बाईपास के पास ले जाकर खेत में जबरन दुष्कर्म किया। रोते बिलखते हुए पीड़िता अपने घर आई तो पुलिस को सूचना दी गई।
आरोपी के ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने जमानत की मांग करते हुए तर्क दिया कि आरोपी व पीड़िता आपस में बात करते थे। इसी आधार पर पीड़िता अपनी मर्जी से आरोपी के साथ गई है। वहीं जमानत अर्जी का विरोध करते हुए विशेष लोक अभियोजक व पीड़िता के अधिवक्ता की ओर से जमानत अर्जी का विरोध किया गया। तर्क दिया कि आरोपी की ओर से एक दलित नाबालिक लड़की के साथ दुष्कर्म किया गया है। आरोपी रसूखदार व्यक्ति है जमानत पर रिहा होने के बाद सबूतों को प्रभावित कर सकता है।